Thursday, 18 October 2018

निखिल की प्रेम कहानी (Episode 2)

घड़ी में 11 बज रहे थे, निखिल और अमन कॉलेज के बाहर आकर ऑटो का इन्तजार करने लगे, लेकिन हॉस्टल की तरफ जाने के लिए कोई ऑटो नहीं था,, निखिल को चिंता होने लगी तभी एक कार तेजी से आकर उन दोनों के सामने आकर रुकी निखिल घबरा कर पीछे हट गया......
तभी कृष्णा गाड़ी से उतर का निखिल के पास आया और कहा तुम दोनों चाहो तो मैं तुम्हें हॉस्टल तक छोड़ सकता हुं....

निखिल - जी नहीं शुक्रिया हम चले जायेंगे.....

अमन - निखिल चलते है ना यार इतनी रात को हमें अब कोई ऑटो नहीं मिलेगा.....
कृष्णा - आराम से सोच लो मुझे कोई जल्दी नहीं है.....
समय को देखते हुए निखिल ने हामी भर दी कृष्णा ने दरवाजा खोला और निखिल और अमन से बैठने को कहा..

दोनों गाड़ी में बैठ गयी कृष्णा ने गाड़ी स्टार्ट की और
हॉस्टल की तरफ चला गया...
रास्ते भर वो अमन से ही कुछ ना कुछ बात करता रहा, उसने अपनी गाड़ी का मिरर सेट किया ताकि वो पीछे बैठी निखिल को देख सके......

गाड़ी हवा से बाते कर रही थी और कुछ ही देर में हॉस्टल आ गया कृष्णा जल्दी से उतरा और गाड़ी का दरवाजा खोल दिया निखिल और अमन गाड़ी से उतर गये वो कुछ बोलते उस से पहले ही कृष्णा बोल पड़ा....
देखा में कितना शरीफ लड़का हु.....
निखिल को फिर से उस पे गुस्सा आ गया और वो वहा से चला गया अमन ने कृष्णा से थक्यू कहा और वो भी निखिल के पीछे पीछे चला गया...

कृष्णा गाड़ी में आकर बैठ गया कुछ देर बैठा रहा और फिर ना जाने उसे क्या सुझा उसने फूल आवाज में गाड़ी में गाना चला दिया.....

"ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा

निखिल ने जैसे ही सुना वो दौडकर खिड़की पर आया और पर्दा हटाकर देखा उसने एक बार फिर अपना सर पिट लिया कृष्णा पागलो की तरह बांहे फैलाये सड़क पर डांस कर रहा था......
गाने की आवाज से अमन भी आ गया उसने उसे देखकर कहां "हाउ रोमांटिक".....

निखिल ने खिड़की बंद कर दी
कृष्णा मुस्कुरा दिया,, तभी वॉचमैन ने चिल्लाकर कहा ओये रोमियो की औलाद गाने बंद कर....

कृष्णा आकर गाड़ी में बैठा और घर की तरफ दौड़ा दी कृष्ण के जाने के बाद निखिल ने एक बार फिर खिड़की खोली और बाहर झांक कर देखा पर कृष्णा जा चुका था.....

उसने खिड़की बंद की और बाथरूम में कपड़े चेंज करने चला गया...
चेंज करने के बाद वो बाहर आया तो अमन ने कहा
निखिल कृष्णा कितना अच्छा है ना।
निखिल -अच्छा वो जब देखो तब मुझे परेशान करता रहता....
अमन - हां, क्योंकि वो तुम्हे पसंद करता है।

निखिल लेकिन मैं उसे बिलकुल पसंद नहीं करता, जब भी वो मेरे सामने होता है मुझे गुस्सा आता है.....
अमन - प्यार की शुरुआत गुस्सा ही है।

निखिल - तु ये आधी रात को अपना प्यार का आलाप गाना बंद कर.......
और सो जाओ चुपचाप

निखिल ने लाइट ऑफ कर दी और लेट गया अमन ने वापस लाइट ऑन की और निखिल के पास आकर कहा मुझे सच में कृष्णा में कोई इंटरेस्ट नहीं है......
निखिल - अमन तेरा दिमाग ख़राब हो गया है।
हाँ या ना अमन ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा

निखिल - नहीं, बिल्कुल नहीं अब सो जा और मुझे
भी सोने दे...
Ok गुड नाईट कहकर अमन सोने चला गया......
अगली सुबह निखिल देर तक सोता रहा उसने अमन से कॉलेज चले जाने को कहा...
आज निखिल का कॉलेज जाने का मन नहीं हुआ,, अमन कॉलेज चला गया निखिल ने कमरे की सफाई की और कपड़े धोये.....
उधर कॉलेज में निखिल के बिना कृष्णा का बिलकुल मन नहीं लग रहा लेकिन वो क्या कर सकता था...
दोपहर में निखिल के मामा उससे मिलने आये निखिल उन्हें देखकर सारी परेशानी भूल गया उन्होंने कुछ देर निखिल से बाते की और फिर कहा सॉरी बेटा, काम की वजह से वक्त ही नहीं मिला इसलिए आने में इतनी देर हो गयी।
निखिल कोई बात नहीं मामाजी आप आये यही हमारे लिए काफी है......
काश तुम्हारी मामी जी भी तुम्हे समझ पाती तो तुम्हे इस तरह यहां नहीं रहना पड़ता.....

निखिल हम समझ सकते है मामाजी लेकिन आप तो जानते ही है मामीजी हमे बिल्कुल पसंद नहीं करती है,
और हम नहीं चाहते हमारे कारण आपके और मामीजी के रिश्तो में दरार आये हम यहा खुश है बस वक्त निकालकर मिलने आ जाया कीजिये.....
जरूर बेटा.....
अच्छा तुम्हारे लिए एक तोहफा लेकर आये थे- मामाजी ने चाबी निखिल की तरफ बढ़ाते हुए कहा निखिल ने देखा किसी स्कूटी की चाबी थी उसने चाबी देखते हुए कहा - इसकी क्या जरूरत थी मामाजी.....
बेटा ये तुम्हारे कॉलेज जाने के लिए रोज रोज बसों में सफर करने से तुम्हे परेशानी होती होगी
निखिल ने मुस्कुराते हुए चाबी ले ली.....
मामाजी साथ में निखिल के लिए और भी ढेर सारा सामान लेकर आये थे...
कुछ देर रुकने के बाद वो वापस चले गए.. अमन जब कॉलेज से आया तो निखिल ने उसे अपनी नयी स्कूटी दिखाई.....
अमन ने घूमने का प्लान बनाया और दोनों बाहर घूमने निकल पड़े......
दोनों अब स्कूटी से कॉलेज जाने लगे......
दिन, हफ्ते , महीने निकलते गए सब धीरे धीरे बदलता गया नहीं बदला तो सिर्फ कृष्णा वो अब भी निखिल को वैसे ही परेशान करता और वो उस पर झल्लाता रहता.....
एक दिन सुबह सुबह जैसे ही निखिल क्लास से बाहर आया कृष्णा भागता हुआ आया और उसे जोर से टकरा गया ठोकर इतनी तेज थी की वो पीठ के बल गिरा और निखिल भी सीधा उसके ऊपर आ गिरा वो खुद को सम्हाल पाता उस से पहले हाथ में पकड़े नोट्स उसके हाथ से छूट गए और इधर उधर उड़ने लगे...
निखिल को उस पर गुस्सा आ रहा था और कृष्णा उसे प्यार भरी नजरे से देखे जा रहा था, सब उनकी तरफ ही देख रहे थे......
वही उठ खड़ा हुया कृष्णा भी उठा वो कुछ कहता उससे पहले ही निखिल ने उसे डांटते हुए कहा - " आप , आप कभी देखकर नही चल सकते, जब देखो तब हमें परेशान करते रहते हैं...
निखिल उसे डांटता गया और वो प्यार से उसकी तरफ देखते हुए सब सुनता गया....
फिर उसने शरमा कर निखिल से कहा " मुझे आप, आप मत कहा करो......
निखिल - क्यों ?
कृष्णा - वो जब तुम मुझे आप आप कहते हो ना तो मुझे हसबैंड वाली फीलिंग आती है कृष्णा ने शरमाते हुए कहा....
निखिल - ठीक है तो आजसे हम तुम्हे तुम कहके बुलाएँगे
निखिल- क्या कह के बुलाओगे 
कृष्णा ने निखिल की तरफ देखते हुए पूछा...
निखिल - तुम, तुम, तुम 
निखिल ने झल्लाकर कहा
कृष्णा- हाय !! कितना चाहते हो तुम मुझे , मेरा नाम रटे जा रहे हो जैसे हर जगह तुम्हे में ही नजर आ रहा हु......
कही तुम्हे मुझसे प्यार तो नहीं हो गया...
निखिल ने कुछ नहीं कहा और पैर पटकते हुए वहा से चला गया...
कृष्णा मुस्कुराते हुए देखता रहा तभी अमन वहा आ पहुंचा और कृष्णा से कहा.....
क्यों परेशान करते हो उसे इतना ?
कृष्णा - क्योंकि वह मुझे सबसे अलग लगता है.... अमन - हां अलग तो है लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था....
कृष्णा - सॉरी अमन
मुझसे नहीं उस से जाकर कहो कृष्णा - इस वक्त बिलकुल नहीं, गुस्सा देखा ना उसका बाद में बोलूंगा पक्का.....
अमन - 2 महीने बाद एग्जाम्स है और तुम्हारी वजह से उसके सब नोट्स बर्बाद हो गए जानते हो उसने कितनी मेहनत से ये नोट्स बनाये थे.....
कृष्णा - सॉरी यार अब मैं क्या करूं?
अमन - मुझे क्या पता तुमने बिगाड़ा है अब तुम ही सही करो
कृष्णा - हम्म तो चलो मेरे साथ
अमन - कहां
कृष्णा - नोट्स बनाने में मेरी मदद करो और कहा - उसने अमन की बांह खींचते हुए कहा.....
कृष्णा - वो बाद में पहले निखिल के नोट्स
अब चलो भी
अमन- नहीं मैं नहीं आ रहा कृष्णा ने उसके कान के पास जाकर धीरे से कहा- अगर नहीं आये तो में निखिल को जाकर बता दूंगा कि तुमने अपने दोस्तों के साथ चिकन बिरयानी खायी थी और वोदका भी पीया था
अमन ने घूरकर उसे देखा तो कृष्णा बोला - चल ना यार दोस्त नहीं है क्या
अमन ने खुश होकर कहा - किसका तुम्हारा ? कृष्णा - नहीं निखिल के...
कृष्णा घसीटते हुए अमन को लाइब्रेरी लेकर गया और फिर उसके साथ मिलकर नोट्स बनाने लगा ...
निखिल हॉस्टल चला आया, नोट्स बर्बाद हो वजह से उसका मन बहुत अशांत था दो निचे बगीचे में आक लगी थोड़ी देर के लिए वहीं बैठ गया वो कृष्णा के बारे में सोचने लगा - आखिर क्यों तो हर वक्त है, हमे परेशान करता रहता है, हम पहले ऐसे तो ना थे और हम बात पे गुस्सा, हर किसी से चिढ़ना, झुंझलाहट होती है निखिल गुमसुम सा बैठा था तभी अमन आ गया और उसे चलने को कहा अमन उसका उदास चेहरा देखकर सब समझ गया था लेकिन वो जानता था की कृष्णा निखिल के नोट्स तैयार कर चूका है......
रात के 9 बज रहे थे वो परेशान सी कमरे में इधर उधर घूम रहा था तभी एक लड़के ने आकर कहा - निखिल तुम्हे वार्डन बुला रहा है निखिल बुझे मन से वार्डन के कमरे में आ गया उसने देखा वार्डन के कमरे में एक लड़की बुर्का पहने खड़ी थी उसका बड़ा सा पेट देखकर निखिल को लगा की वो प्रेग्नेंट है
तभी वार्डन ने कहा - निखिल ये कुछ देर के लिए यही रुकेगा, बाकि लड़को के कमरे में बहुत भीड़ है इसलिए थोड़ी देर ये तुम्हारे कमरे में रहेगी ध्यान रहे ये पेट से है इन्हे कोई परेशानी न हो, इन्होने अपने पति को फोन कर दिया है थोड़ी देर में वो आ जाएंगे,
निखिल ने हाँ में सर हिला दिया वार्डन ने उसे निखिल के साथ जाने का इशारा किया और खुद काम में लग गये
निखिल उसे लेकर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया ...
निखिल उसे सहारा देकर कमरे में ले आया....
अमन भी वही मौजूद था..
निखिल ने उसे बैठने का इशारा किया और पूछा - आप कुछ लेंगी, पानी, कॉफी या चाय उसने ना में गर्दन हिला दी...
निखिल - ठीक है, आप आराम कीजिये, अमन अपने पलंग पर बैठे कोई मैगजीन पढ़ रहा था और निखिल अपने कपड़े समेट रहा था तभी निखिल के पास एक बॉल आयी उसने बॉल उठाकर सामने दिखाई दे बुर्का वाली लड़की झुककर कुछ उठा रही थी तभी उसके बुर्के से दूसरी ऑल आ गिरी निखिल ने शक भरी नजरो से उसे देखते हुए पूछा - कौन हो आप ? वो कुछ नही बोली - देखिये सच सच बता दीजिये वरना हम भी वार्डन को बुलाते है
उसने चेहरे से बुरखा उठा दिया बुरखा उठाते ही निखिल ने जोर से कहा - तुम ?
बुर्का पहने कोई और नहीं कृष्णा खड़ा था..
उसने तेजी से | आगे बढ़कर निखिल का मुंह अपने हाथ से बंद किया और उसे दिवार से सटाकर कहा- तुम पागल हो क्या ?
किसी ने सुन लिया न तो मैं तो गया काम से कृष्णा निखिल के बहुत करीब था उसने उसकी बड़ी बड़ी आँखों में देखा और कहा - ऐसे मत देखो, मुझे प्यार हो जायेगा निखिल ने आँखो से कृष्णा को हाथ हटाने का इशारा किया - तुम फिर से चिल्लाये तो ?
निखिल ने गर्दन हिलाकर ना का इशारा किया तो कृष्ण ने हाथ हटा दिया,
निखिल ने उसे धक्का देकर खुद से दूर किया और कहा - तुम यहाँ क्यों आये हो ?
किसी ने तुम्हे यहा देख लिया ना तो प्रॉब्लम हो जाएगी कृष्णा ने बुरखे से कुछ कागज निकालकर निखिल को देते हुए कहा - तुम्हारे नोट्स
निखिल - वो तो तुम कल भी बोल सकते थे और नोट्स कल दे देते...
कृष्णा - हम्म ,, लेकिन मुझे तुमसे मिलना था उसने निखिल को उपर से निचे तक देखते हुए कहा - वैसे नाईट ड्रेस में भी तुम अच्छी लगते हो
निखिल- नोट दे दिए जब जाओ यहाँ से कृष्णा ने बेड पर लेटते हुए कहा - सोच रहा हूं कल सुबह चला जाऊ
निखिल ने उसकी बांह पकड़कर उसे उठाते हुए कहा - प्लीज़ जाओ यहाँ से
कृष्णा - छूने के लिए थक्यू...
निखिल ने तुरंत उसकी बांह छोड़ दी...
तभी अमन ने कहा - यार !! ऐसा तो 1990 की फिल्मो में होता था जब हीरो हेरोइन के कमरे में चोरी छीपे जाता है,
कृष्णा उठकर अमन के पास आ गया और बोला - हाँ लेकिन तुम्हारा इस खडूस दोस्त का इन सब से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है, इसे कुछ सिखाओ....
निखिल - हमे कुछ सिखने की जरूरत नहीं है तुम निकलो यहा कृष्णा ने खिड़की के बाहर जाते हुए कहा - अच्छा
निखिल- तुम कोई काम सी तरीके से नहीं कर सकते क्या ?
कृष्णा - करता हुं ना
निखिल- क्या?
कृष्णा - पास आओ बताता हूँ निखिल चलकर खिड़की की तरफ जाता है और कहता है - बताओ ?
कृष्णा सोचने का नाटक करता है और फिर कहता है- बाद में बताऊंगा।
निखिल फिर झल्ला गया वो कुछ कहता उस से पहले वो खिड़की से निचे कूद गया ...
निखिल बेड पर आकर बैठ गया अमन उसके पास आकर बैठ गया तो निखिल ने झुंझलाते हुए कहा - इस लड़के का हम क्या करें ?
तुमने देखा ना ये कैसी हरकत करता है, और ऐसे ही अपनी स्टुपिड हरकतों से हमे हमेशा परेशान करता रहता है
अमन - निखिल मानता हुं वो तुम्हें परेशान करता है, लेकिन वो दिल का बुरा नहीं है,
उसे की तुम्हारे नोट्स खो गए तो उसने दोबारा नोटस बनाये और इस वक्त तुम्हें देने आया, कृष्णा बुरा लड़का नहीं है मैंने हमेशा उसकी आँखों में तुम्हारे लिए सम्मान ही देखा है
निखिल- पर मैं जब हम उसे देखते है तो हमे सिर्फ गुस्सा आता है
अमन- गुस्सा तो मुझे आ रहा है तुम पर, तुमने उसे नोट्स के लिए थक्यू भी नहीं कहा उल्टा उसे 2 बातें सुना दी
निखिल - सॉरी यार , वो जब सामने होता है कुछ समझ नहीं आता हमे
निखिल उठकर खिड़की की तरफ उसने देखा हॉस्टल से बाहर कृष्णा की गाड़ी खड़ी थी वो जा ही रहा था की उसने पलटकर देखा निखिल को खिड़की पर देख मुस्कुरा दिया, निखिल भी मुस्कुरा दी और खिड़की बंद कर चला गया......
अगले दिन निखिल कॉलेज पहुँचता है क्लास में जाकर पता चला निरंजन सर आज छुट्टी पर है, ना
निखिल क्लास से बाहर आकर लाइब्रेरी जाने लगा वो लाइब्रेरी की तरफ बढ़ा कृष्णा उसे लायब्रेरी के गेट पर ही दिख गया, वो रास्ता बदल गार्डन की तरफ चल दिया
रवि और रवि के कुछ दोस्त वही बैठे थे... तभी उनमे से किसी एक ने कहा - भाई देख निखिल आ रहा है।
रवि ने मुस्कुराते हुए निखिल की तरफ देखा "अरे क्या भाई देखते ही रहोगे या फिर कुछ बात भी करोगे"
दूसरे ने कहा निखिल जैसे ही रवि के पास से गुजरा रवि ने कहा - हाय !!
निखिल ने पलटकर देखा तो पीछे रवि और उसके कुछ दोस्त खड़े थे ।
निखिल - हेलो रवि - क्या हुआ आज तुम कॉलेज नहीं गये ?
निखिल - हाँ वो आज निरंजन सर छुट्टी पर है
रवि - और अच्छा ,, तो फिर चलो ना कॉफी पिते है ..
"अभी हमे कुछ नोटस बनाने है, फिर कभी - कहकर निखिल आगे बढ़ गया रवि ने लपक कर निखिल का हाथ पकड़ लिया और कहा - कम ऑन यार निखिल, आधे घंटे की ही तो बात है।
हमारा हाथ छोडो"
क्या - रवि ने निखिल की बात अनसुनी कर दी "हमने कहा हमारा हाथ छोड़ो - ये कहकर निखिल ने पटककर अपना हाथ रवि के हाथ से छुड़ा लिया ..
रवि - हाथ पकड़ लिया तो कोई गुनाह कर दिया क्या "अरे भाई रहने दे वरना घर जाकर पापा से शिकायत कर देगा"
रवि के दोस्त ने कहा
आँखे भर आई उसने कुछ नहीं कहा और आगे बढ़ गया कृष्णा वही खड़ा ये सब सुन रहा था वो आया और रवि से कहा- ये तूने सही नहीं किया कृष्णा के इतना बोलते ही रवि ने उसे जोर से एक घुसा मारा और गिर गया उसके होंठ से खून आने लगा..
निखिल ने जब देखा तो वो रवि की तरफ गया उसने अपनी पास खड़ी लड़की को किताबे पकड़ा कर और जाकर एक घुसा रवि की नाक पर दे मारा रवि को नाक से खून बहने लगा, रवि खुद को सम्हाल पाता उस से पहले निखिल ने एक जोर का मुक्का उसके मुंह पर मारा और वो दूर जा गिरा.....
निखिल का ये रूप आज सबने पहली बार देखा था, रवि के दोस्त वहा से खिसक गए .,
कृष्णा बैठे बैठे निखिल का नया रूप देखकर मुस्कुरा रहा था ...
निखिल उसके पास आया उसका हाथ पकड़कर और खींचते हुए उसे अपने साथ ले गया ..
उसे बिल्कुल सामने बैठ गयाना उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था उसने बैग से रुमाल निकाला और कृष्णा के होठो पर आये खून को साफ करते हुए प्यार से कहा - क्या जरुरत थी, ये सब करने की ,, उसने एक घुसा मारा और तुम जमीन पर , कृष्णा - लेकिन वो तुम्हारे साथ बदतमीजी कर रहा था
निखिल - जानते है, पर जब हमने कुछ नहीं कहा तो तुम्हें क्या जरूरत थी, वो अमीर बाप की बिगड़ी हुयी औलाद है
शांति से रहकर पढ़ाई करनी है, इसलिए हमने उसके मुंह लगना जरूरी नहीं समझा ...
जैसे जैसे निखिल बोलता जा रहा था कृष्णा गर्दन हिलाये जा रहा था...
जैसे निखिल उसके बाद को छू रहा था उसे लग रहा था जैसे कोई उसके दिल को छू रहा है, वो मुस्कुराते हुए निखिल में खो गया .,
निखिल ने देखा उसके हाथ में भी चोट लगी है उसने वो रुमाल कृष्णा के हाथ पर बांध दिया.. और उठकर जाने लगा ... "
क्या तुम मेरी दोस्त नहीं बन सकते - कृष्णा ने मासूमियत से कहा
निखिल ने पलटकर कहा - बन सकते है.. "फ्रेंड्स"
कृष्णा ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर कहा
निखिल - पर हमारी एक शर्त है "मुझे तुम्हारी है शर्त मंजूर है"
कृष्णा ने बिना निखिल की शर्त सुनते ही कहा
निखिल- तो ठीक है, 2 महीने बाद तुम्हारे एग्जाम है, तुम्हे उसमे 1s डिवीजन से पास होना है, उसके बाद आकर हमसे दोस्ती का हाथ मिला सकते हो .. कृष्णा ने सोचा नहीं था निखिल उसके सामने ऐसी कोई शर्त करेगा......
मरता क्या न करता बेचारगी से अपना हाथ पीछे करके मिमियाते हुए कहा - ठीक है..
करनी होगी, और मुझे परेशान भी नहीं करोगे .. कृष्णा ने मन ही मन में कहा - साला शर्त में भी शर्त ...
उसने हाँ में गर्दन हिला दी....वह चला गया कृष्णा मुंह लटकाये वही खड़ा रहा ...
तभी अमन आया और कहा - क्या हुआ? मुंह क्यों लटका है तुम्हारा ?
कृष्ण-यार मेरी राधा तो मेरी ही बांसुरी बजा कर चला गया ...
अमन - हुआ क्या ?
कृष्णा - यार दो गिनती 100 उठक बैठक निकाल में निकाल देता, वो कहता किसी को पिट में पिट देता ,,
अरे वो कहता सिग्नल पर खड़ भिख मांगते हैं वो भी मांग लेता।
लेकिन वो तो मुझे कॉलेज में फस्ट आने का बोल रहा है, मैं पास हो जा वो ही बहुत है
अमन हसने लगा फिर कहा- तो अब तुम क्या करोगे?
कृष्णा - करना क्या है यार, पापा ने पनिशमेंट के तोर पर भेजा था, लेकिन असली पनिशमेंट तो वो दे रहा है मुझे
कृष्णा और अमन दोनों बात कर ही रहे थे की तभी रवि अपने दोस्तों के साथ आया और कृष्ण से कहा निखिल के सामने बहुत हीरो बन रहा था, अब निकालता हूँ तेरी हीरोगिरी "
लगता है उसकी मार से तेरा पेट नहीं भरा" - कृष्णा ने शर्टकी बाजु फोल्ड करते हुए कहा
रवि - तू मारेगा मुझे, कृष्णा और रवि की बातें सुन अमन ने कृष्णा का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए कहा - कृष्णा क्या रहे हो, वो पिट देंगे तुम्हें "
ये क्या मारेगा मुझे जब देखो तब लड़कियों की तरह पीछे छुप जाता है
रवि ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा कृष्णा ने अमन को पीछे हटने का इशारा किया .. और आगे आकर रवि को एक घुसा मारा रवि सीधा जमीन पर वा.. उसके बाद उसने रवि और उसके दोस्तों को खूब पिटा,
अमन देखता ही गया.,, तो कृष्ण जो कुछ देर पहले सिर्फ एक घुसे में गिर गया था वो अब उन सबको कुत्तो की तरह मार रहा है कृष्णा का ऐसा रूप देखकर रवि डर गया उसने हाथ जोड़ते हुए कहा - बस, अब और मत मार
कृष्णा ने उसे ऊँगली दिखाते हुए कहा - आज के बाद अगर निखि के आस पास भी नजर आया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा
रवि वहाँ से चला गया,
कृष्णा अमन के पास आया तो अमन ने कहा - निखिल के सामने तो तूने उनसे मार खाई और अब उन्हें.....
कृष्णा ने मुस्कुराते हुए अमन के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - वो क्या है ना डार्लिंग मुझे उसकी आँखों में अपने लिए फ़िक्र देखनी थी, इसलिए एक घुसा खा लिया,, दूसरी बात तेरा दोस्त मुझे वैसे ही पसंद नहीं करता उसके सामने मारा  मारी करता तो बिलकुल पसंद नहीं करता... समझ आया कुछ। अमन ने सर हिलाते हुए कहा - समझ गया कृष्णा ने अपने होठ की तरफ इशारा करते हुए कहा - रवि ने जब यहाँ मारा तो सिर्फ यही दर्द हुआ लेकिन निखिल ने जब यहाँ छुआ तो सीधा दिल में दर्द हुआ अमन ने कंधे से उसका हाथ हटाकर जाते हुए कहा - हट ! नौटंकी साला अरे !!
सुन तो - कृष्णा ने उसे आवाज दी लेकिन अमन चला गया ...
कृष्णा भी घर चला गया.....
स्वाति हॉस्टल आ गया ...
अगले दिन अमन और निखिल जब कॉलेज पहुंचे तो देखा सब रोज जैसा ही है बस कृष्णा दिखाई नहीं दे रहा था .
निखिल ने अपनी क्लास और कृष्णा को ढूंढने लगी पर दोनों कहीं दिखाई नहीं दिया वो लायब्रेरी चला आया उसने देखा एक कोने में ढेर सारी किताबे लिए कृष्णा बैठा है, निखिल उसके पास गयि लेकिन उसने उसे देखा तक नहीं वो किताबों में लगा रहा...
निखिल वापस आ गयि ..
एक दिन कृष्णा निखिल के सामने से गुजर रहा था तो उसने उसे रोकते हुए कहा - कृष्णा
कृष्णा - सॉरी निखिल अभी मेरे पास वक्त नहीं है मुझे बहुत सारी पढ़ाई करनी है - कहकर आगे बढ़ गया
निखिल उसे देखते ही रह गया ..
तो स्वाति ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - जब वो तुझे परेशान करता था तब तुझे गुस्सा आता था, आज जब वो चुप है तो भी तू परेशान है।
निखिल ने कुछ नहीं कहा , बस जाते हुए कृष्णा को देखत रहा
अमन - तुमने उसके सामने ऐसी शर्त रखकर अच्छा नहीं किया निखिल
निखिल- हमने सोच समझकर ये शर्त रखी है, लोग यहाँ पढ़ने आते है और उसके पापा ने भी उसे पढ़ने के लिए ही यहाँ भेजा है, लेकिन वो इस पनिशमेंट समझ वक्त और पैसा बर्बाद कर रहा है, अगर वो सच में हमसे दोस्ती करना चाहता है तो हमारे इस शर्त को जरूर पूरा करेगा....
उसके पापा को सही साबित करने के लिए ही हमने ये सब किया ..
अमन - निखिल कभी कभी मैं तुम्हे बिल्कुल नहीं समझ पाता निखिल मुस्कुरा दीया और कहा - धीरे धीरे समझ जाओगे दोनों अपनी अपनी क्लास की तरफ चल दीये...
कुछ दिन एक्जाम की डेट आ गयी
अमन और निखिल भी पढ़ाई में जुट गए 
इस बार भी निखिल के पेपर काफी अच्छे हुए, लेकिन उसे कृष्णा की फ़िक्र हो रही थी एग्जाम्स के बाद कृष्णा निखिल को कही दिखाई नहीं दिया... रिजल्ट वाले दिन सभी कॉलेज में जमा थे..
निखिल और अमन भी कॉलेज आ गए अमन ने कहा - जानता हूँ तू तो इस बार भी फस्ट आया होगा, में जाकर अपना रिजल्ट देख लेता हुं कॉलेज में हर साल स्टूडेंट्स एक टॉप 10 की लिस्ट होती थी, जो की अलग बोर्ड पर लगी थी और बाकि सबका रिजल्ट अलग बोर्ड पर अमन गया और उसने रिजल्ट देखना शुरू किया, इस बार उसके पेपर ज्यादा अच्छे नहीं हुए थे इसलिए मन में थोड़ी घबराहट थी धड़कते दिल से तो एक एक कर नाम देखते जा रहा था और फिर 2nd रों में उसे अपना नाम दिख ही गया
उसने राहत की साँस ली, उसने सोचा कृष्णा का रिजल्ट भी देख लेता हुं, लेकिन उसे कही भी कृष्णा का नाम नहीं मिला उसने एक बार फिर से लिस्ट में देखा लेकिन उसे उसका नाम कहीं नहीं दिखा तो मुंह लटकाए वापस निखिल के पास आ गया लेकिन निखिल उस से भी ज्यादा परेशान खड़ा था,
अमन उसके पास आया और रोआसा होकर कहा - यार लिस्ट में कही कृष्णा का नाम नहीं है, मुझे लगता है वो फ़ैल हो गया निखिल ने कुछ नहीं कहा वो अब भी परेशान था
अमन  ने उसे हिलाते हुए कहा - तू क्यों परेशान है ? तू तो फस्ट आया होगा ...
निखिल ने धीरे से कहा- नहीं सेकेण्ड .. . "तो फिर फर्स्ट कौन आया ?
अमन ने चौंकते हुए पूछा खुद ही जाकर देख ले - कहकर निखिल वही सीढ़ियों में बैठ गया  दौड़ते हुए 1st बोर्ड के पास गई उसने देखा निखिल का नाम सेकेंड नंबर पर था उसने जैसे ही फर्स्ट नंबर पर नाम देखा उसका मुंह खुला का खुला रह गया
*कृष्णा सिंह राणावत*
अमन को बहुत खुशी हुयी लेकिन साथ ही आश्चर्य भी की ये चमत्कार कैसे हो गया ..
वो निखिल के पास आया और खुशी से उछलते हुए कहा - उसने तो कमाल कर दिया, मैंने तो सोचा भी नहीं था ऐसा भी होगा
निखिल उठ खड़ा हुया और कहा - उसके आने से पहले हम चलते है यहाँ से निखिल जैसे ही आगे  बढ़ा कृष्णा अचानक से उसके सामने आ गया और कहा - तुमने जो कहा हमने वो किया अब तुम्हारी बारी है
निखिल ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया कृष्ण ने भी उस से हाथ में हाथ मीलाया.....

"कॉफी" - कृष्णा ने कहा "
बात सिर्फ दोस्ती की हुयी थी - निखिल ने हाथ छुड़ाते हुए कहा "फर्स्ट आने की खुशी में ट्रीट समझ कर ही पि लो - कृष्णा ने कहा और फिर अमन की तरफ देखकर कहा - क्यों डार्लिंग चलोगे ना .. अमन ने खुशी खुशी गर्दन हिला दी,
निखिल ने घूरकर अमन को देखा और धीरे से कहा - डार्लिंग ?
अमन - वो मजाक कर रहा है निखिल ,
और अब तो तुम दोनों दोस्त भी बन चुके हो चलो ना यार ।
अमन के कहने से निखिल उन दोनों के साथ कैंटीन की तरफ चल दिए......
दूर खड़ा रवि ये सब देखकर जल भून रहा था ..
2 सालो में आज पहली बार निखिल ने कैंटीन में कदम रखा था सबकी नजरें उस पर ही थी 
तीनो ने कॉफ़ी पी और थोड़ी देर बात करने के बाद वापस आ गए.....
निखिल और अमन हॉस्टल आ गये और कृष्णा अपने घर चला गया ...
कॉलेज की झुट्टियां शुरू हो चुकी थी
अमन अपने घर चला गया निखिल मामाजी के साथ उनके घर चला गया और कृष्णा भी अपने गांव आ गया...

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Saturday, 13 October 2018

निखिल की प्रेम कहानी ( Episode 1)

मति

मणि

मणि तुम्हे कुछ नहीं होगा निखिल नींद में जोर से चिल्लाये जा रहा था और फिर झटके से उसकी आँख खुल गयी वो पसीने से तरबतर हो चुका था और हांफ रहा था....
निखिल का रूममेट अमन भागकर उसके पास आया और उसके पास बैठते हुए कहा फिर से वही सुना
निखिल ने हाँ में गर्दन हिला दी....
अमन- निखिल समझ नहीं आता रोज सुबह तुझे ये सपना क्यों आता है, क्या तुम्हारे अतीत से जुड़ा है....
निखिल- नहीं हम खुद नहीं जानते बचपन से हमे ये
सपना आता है और सबसे बड़ी बात आखिर कौन है ये मणि क्यों बार बार नींद में हम इसका नाम पुकारते है होगा तेरा कोई आशिक़ अमन ने उसकी टांग खींचते हुए कहा.....
निखिल हमारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, तुम जाओ यहाँ से

अमन- अच्छा बाबा सॉरी टेबल पर कॉफी रखी है पी
लेना, मैं नहाने जा रहा हु और तुम भी जल्दी से नहा लो, रूचि मैडम का लेक्चर है मिस नहीं करना मुझे।

कहकर अमन बाथरूम की तरफ बढ़ गया

निखिल और अमन 1 साल से हॉस्टल में साथ साथ रह रहे थे रूममेट्स के साथ साथ दोनों अच्छे दोस्त भी थे निखिल के माता पिता की बचपन में ही मौत हो गयी थी तबसे निखिल अपनी दादी के पास रहता और कुछ समय बाद ही उसकी दादी भी चल बसी निखिल बिलकुल अकेला हो गया उसने कॉलेज में एडमिशन लिया और हॉस्टल में ही रहने लगा
पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उसे स्कॉलरशिप मिल
जाया करती थी, साथ ही उसके मामाजी सबसे छुपाकर उसे पैसे भेज दिया करते थे..
बचपन से उसे एक ही बात ने परेशान कर रखा था वो था वो सपना जो हर रोज उसे आता था और बचपन से ही उसके हाथ पर एक निशान जैसा कुछ
बना हुआ था जो देखने में किसी आधे पत्ते जैसा लगता था निखिल एक ब्राह्मण परिवार से था लेकिन ना जाने क्यों उसमें गुण क्षत्रिय थे, उसकी चाल उसका व्यवहार, उसके बात करने का तरीका, बिल्कुल अलग था, उसका शांत स्वभाव
सहज बोली, और सादगी हर किसी को उसका दीवाना बनाने के लिए काफी था

"निखिल तू अभी तक यही बैठा है कॉलेज नहीं जाना क्या अमन ने उसे घूरते हुए कहा

निखिल उठा और बाथरूम में घुस गया, जल्दी जल्दी तैयार होकर दोनों बस स्टाप पहुंचे, कुछ ही मिनिट बाद बस आ गयी और दोनों बस में चढ़ गये भी ज्यादा होने के कारण सीट नहीं मिली तो दोनों को खड़े रहना पड़ा, उस बस से अधिकतर कॉलेज स्टूडेंट ही जाते थे..

कॉलेज आते ही दोनों उतर गये, निखिल का कॉलेज में ये दूसरा साल था वो बाकि लड़को की तरह न कैंटीन में जाता ना ही दोस्तों के साथ बैठकर गप्पे लड़ाता क्लास लेने के बाद या तो वो बगीचे में बैठे किताबे पढ़ता रहता या फिर लाइब्रेरी में जाकर नई नई किताबो के बारे में जानकारी लेता रहता अब तक वो लायब्रेरी की अधिकांश किताबे पढ़ चूका
था न वो किसी से ऊँची आवाज़ में बात करता ना ही किसी से कोई बहस, झगड़ा उसे शांत रहना ज्यादा पसंद था और यही वजह थी की कॉलेज के सभी टीचर्स की वो हितेषी था......

पैंट शर्ट पहने, हाथो में किताब लिए, वो अमन के साथ कॉलेज में दाखिल हुया, उसने एक नजर घुमाकर देखा और आगे बढ़ गया निखिल क्लास की तरफ चला गया और अमन अपने बाकि दोस्तों की
तरफ....
निखिल जैसे ही क्लास में दाखिल हुया किसी से टकरा गया हाथ में पकड़ी उसकी सारी किताबे निचे गिर गयी, वो जैसे ही किताबे उठाने के लिए निचे झुका उसका सर उस से टकरा गया जिससे वो टकराया था उसने अपनी बड़ी बड़ी पलको को उठा कर उसकी तरफ देखा......
बिखरे बाल, भूरी आँखे, सुर्ख लाल होठ और चेहरे पर हलकी दाढ़ी थी, गले में कोई चैन जैसा कुछ पहन रखा था उसने निखिल कुछ कहता उस से पहले ही वो बोल पड़ा सॉरी सॉरी, वो मैंने देखा नहीं था
its ohk निखिल ने बिना उसकी तरफ देखे अपनी किताबे उठाते हुए कहा

वो निखिल के चेहरे को बस देखता ही जा रहा था.. निखिल अपनी किताबे उठा चुका था वो जाने लगा तो उस लड़के ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा हाय आई ऍम कृष्णा

निखिल ने उसकी तरफ देखा और किताबो को हाथो में समेटे हुए कहा हमारा नाम निखिल है, 2nd ईयर के स्टूडेंट है.....
हमारा हमारा की होता है, मेरा होता है कृष्णा ने मजाक में कहा...
जी हम ऐसे ही बात करते है निखिल ने कहा और वहा से चला गया....
कृष्णा उसे देखता ही रह गया और सोचने लगा कुछ बात तो है इसमें हमारा पागल कही का कहकर वो मुस्कुराने लगा
कृष्णा ने देखा कॉलेज में एक से बढ़कर एक बला की खूबसूरत लड़किया थी, कोई जीन्स पहने कमर लचकाते घुम रही थी कोई लड़के का हाथ पकडे प्यार भरी बातें कर रही थी लेकिन
उसकी नजर बार बार क्लास में बैठे निखिल पर चली जाती, उसकी सादगी के सामने ये सब लड़किया
कुछ भी नहीं थी वो कोई किताब पढ़ने में मग्न था शायद....
कृष्णा अब भी गेट पर ही खड़ा था तभी बेल बजी और सभी क्लास में आकर बैठ गए।

कृष्णा दिखने में खूबसूरत तो था ही काफी हसमुख भी था लड़किया आते ही उसकी फैन हो गयी और उसके इर्द गिर्द घूमने लगी,, वो सबसे बात कर रहा था पर उसका ध्यान निखिल पर था,, निखिल ने एक बार भी कृष्णा की तरफ नहीं देखा तो उसे लगा की वो घंमडी किस्म का है.....

क्लासे शुरू हो गई, कुछ पढ़ रहे थे और कुछ पढ़ने का नाटक एक पीरियड ख़त्म हुआ टीचर के जाते ही फिर से सब शोर करने लगे निखिल को शोर शराबा बिल्कुल पसंद नहीं था वो उठकर क्लास से बाहर आ गया वो सीढियों में बैठकर किताब पढ़ने लगा कृष्णा अपने दोस्तों के साथ उधर से गुजर रहा था निखिल को देखकर रुक गया और दोस्तों को जाने का इशारा किया.. वो आकर निखिल से कुछ दूरी बनाकर बैठ गया और निखिल से कहा तुम क्या हमेशा पढ़ते रहते हो निखिल हां, हमे पसंद है कृष्णा पर हर वक्त, कोई कैसे पढ़ सकता है निखिल हमे बाकि लोगो की तरह वक्त बर्बाद करना पसंद नहीं.....

कृष्णा उसके जवाब के आगे चुप हो गया और निखिल अपनी किताब में....
कृष्णा ने निखिल की तरफ देखते हुए सोचा कुछ तो खास है इस लड़के में जो इसे बाकि लोगो से अलग बनाता है....
वो कब वहा से उठकर चला गया मुझे पता ही नहीं चला बहुत ढूंढा उसे पर वो नहीं दिखा..

घूमते घूमते वो लायब्रेरी के सामने से गुजरा अचानक उसकी नजर निखिल पर गयी,, वो किताबों को रॉ में लगा रहा था सहसा ही कृष्णा के कदम भी लायब्रेरी की तरफ बढ़ गए वो बिल्कुल निखिल के सामने वाली रॉ में किताबे देखने लगा दोनों एक ही रॉ के दोनों तरफ थे किताबे देखते हुए दोनों ने एक ही किताब को उठाया....
कृष्णा को अपने सामने देखकर निखिल ने कहा आप रख लीजिये कहकर वो दूसरी साइड चला गया...
कृष्णा ने किताब ली और टेबल पर आकर बैठ गया पर उसका ध्यान कही और ही था,, जीस निखिल के हम पर वो हसा था वो ही अब उसे बहुत भा रहा था, कितनी तहजीब थी उसके शब्दों में वो कम बोलता था पर जो बोलता था सीधा दिल को लगता था क्लासे फिर शुरू हो गयी, कृष्णा आकर इस बार निखिल के बगल वाली कुर्सी पर आ बैठा.....
निरंजन सर क्लास ले रहे थे पर उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं था तभी निरंजन की नजर उस पर पड़ी और उन्होने कृष्णा को खड़े होने को कहा....

कृष्णा खड़ा हो गया तो निरंजन सर ने कहा तुम नाम क्या है तुम्हारा जब तुम लोगो को पढ़ना ही नहीं होता तो क्लास में आते क्यों हो लड़कियों को देखने या फिर अपने साथ साथ हमारा समय बर्बाद करने माँ बाप ने यहाँ तुम्हे पढ़ने के लिए भेजा है लेकिन तुम्हे तो आते ही यहाँ प्यार मोहब्बत करनी है, कॉलेज के बहाने घूमने जाना है, घरवालों का पैसा
बर्बाद करना है बस बाहर निकलो मेरी क्लास से.....

कृष्णा बिना कुछ बोले चुपचाप क्लास से बाहर चला गया निखिल को निरंजन सर की ये बात बिलकुल अच्छी नहीं लगी वो अपनी जगह खड़ा हुया और उनसे धीरे से कहा सर माफ़ी चाहते है, लेकिन बिना जाने आपने उनसे इतना सब कहा ये सही नहीं है, क्लासे आज से ही शुरू हुयी है, और यहाँ पुराने से ज्यादा नए स्टूडेंट्स है जिनको यहाँ के रूल्स का
नहीं पता,, वो लड़का आज ही क्लास में आया है, और आप भी पहली बार उनसे मिले है आप उनको जानते तक नहीं फिर भी आपने उनका बैकग्रॉउंड बता दिया, हम ये नहीं कह रहे की आप गलत है पर इस तरह सबके सामने किसी स्टूडेंट के बारे में ये सब बोलकर उसे सबके सामने शर्मिंदा न किया करे यही मेरी आपसे रिक्वेस्ट है।

निखिल की बात सुनकर निरंजन को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने निखिल से कहा सॉरी निखिल आगे से मैं इन सब का ध्यान रखूगा...

सब निखिल की तरफ देखने लगे. लड़के सब उसके फैन हो चूके थे और लड़किया जल भून गयी एक टीचर भी निखिल की बात मानने को तैयार था....

बाहर खड़ा कृष्णा सब सुन रहा था उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था निखिल उसके लिये ये सब बोल रही थी क्लास खत्म होने के बाद निरंजन बाहर चला गया और बाहर जाकर कृष्णा से कहा  i m sorry
और कृष्णा "it's ok " सर कृष्ण ने कहा

कॉलेज की छुट्टी हो चुकी थी. सभी घर जाने लगे कृष्णा निखिल के पास आया और कहा  Thank you
किसलिए?
कृष्णा वो सर से तुमने मेरे लिए वो सब कहा ना
आपकी जगह कोई और होता तो भी हम वही करते,
कहकर निखिल वहाँ से चला गया.....
कृष्णा मुंह फाड़े उसे देखता ही रह गया वो चंद पलो में कृष्णा को अर्श से फर्श पर गिरा कर चला गया..
जिस लड़के पर कॉलेज की आधे से ज्यादा लड़कियाँ पहले दिन ही फ़िदा हो गयी उसे निखिल सबके बराबर करके चली गया कृष्णा सोच ही रहा था की तभी उसके दोस्त अमित ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा वो ना पटेगा
कृष्ण ने अमित की तरफ देखकर मासूमियत से पूछा
क्यों ?
क्योकि भाई उसे पढ़ाई के अलावा कुछ अच्छा नहीं लगता, कॉलेज के सब लड़कियों कोशिश कर चुकी है पर वो किसी कोभाव नहीं देता, उसका सपना है I A S ऑफिसर बनने का और उसके अलावा वो कुछ नहीं सोचता....
कृष्णा उत्साहित होकर बोला और क्या जानता है उसके बारे में अमित उसका नाम निखिल शर्मा है, मेवाड़ की रहने वाला है माँ-बाप बचपन में ही गुजर गए, परिवार में अपना कहने के लिए कोई नहीं था तो यहां आ गया अभी 1 साल से हॉस्टल में रह रहा है, कॉलेज की सबसे होशियार और अच्छा स्टूडेंट है
पिछले साल ही यूनिवर्सिटी टॉप करके उसने स्कॉलरशिप पाया है, ज्यादा किसी से बात नहीं करता, इसलिए तू इसके सपने मत देख तेरा कुछ नहीं होगा, मैं जितना जानता था।
तुझे बता दिया....
कृष्णा- मेवाड़ से है, तभी इतना मस्त बोलता है।

अमित ओह्ह सपनो के शहंशाह बाहर आओ अपनी
दुनिया से तुम्हारी दाल वहाँ नहीं गलने वाली....

कृष्ण ने अमित को कंधे पर हाथ रखते हुए कहा अगर ऐसा है तो अपनी किताब में लिख लो इस कृष्णा की राधा तो अब यही बनेगी.....
उसके बाद दोनों घर चले गए......
निखिल और अमन भी हस्टल में आ चुके थे निखिल अपने पैर पसार बैठ गया और अमन उसकी गोद में।
सर रखकर लेट गया और कहने लगा आज मैंने जो देखा कसम से मेरा दिल ही बाहर आ गया, क्या लड़का है यार भूरी भूरी आँखे, उसकी हाइट उसकी बॉडी उसका चलना,मुस्कुराना बात करना उफ़ ऐसा लड़का मैंने आज तक नहीं देखा....

निखिल ने अमन से कहा तो तुम कॉलेज ये सब देखने जाते हो..

अमन हां तुम्हारी तरह दूसरी दुनिया के तो है नहीं जो पूरा दिन किताबो में घुसे रहे.. अच्छा वो सब छोड़ उस लड़के के बारे में सुन क्या दिखता है यार वो, कॉलेज की सारी लड़किया उस पर फ़िदा है और क्यों न हो उसका नाम भी तो "कृष्णा" रह गया..

निखिल ने चौंककर कहा कृष्णा

अमन हाँ कृष्णा,, तभी तो सब लड़किया गोपिया बनी है उसके आगे पीछे घूम रही थी, पता नहीं कौन बनेगी उसकी राधा.....

निखिल ने अमन से कहा तेरा दिमाग ख़राब हो गया है
अमन तू क्या जाने प्यार, दोस्ती, क्रश, घूमना, फिल्मे,
रोमांस तुझे तो तेरी इन स्टुपिड सिली बुक्स से फुर्सत ही नहीं मिलती....

निखिल हाँ हम खुश है इनके साथ....

अमन क्या खुश हो तुम्हारी जिंदगी में कुछ है ही नहीं,एकदम बोरिंग इंसान की तरह रहते हो कॉलेज की उम्र में ही प्यार, रोमांस होता है.....

निखिल तुम्हें क्या लगता है हम बाहर नहीं निकलना चाहते तुम सब लोगो की तरह हम भी बाहर की दुनिया देखना चाहते है, फिल्मे घूमना, नए दोस्त बनाना, दोस्तों के साथ वक्त बिताना हमे भी पसंद है लेकिन तुम जानते हो मामाजी कैसे सबसे छुपकर हमारी मदद कर रहे है ताकि हम अपनी पढ़ाई
कर सके और कुछ बन सके, हमारे लिए कुछ बनना जरुरी है....
प्यार हम बाद में भी कर सकते है, हमारे लिए जो बना है वो एक दिन हमें मिल जायेगा...।
अमन मेरा वो मतलब नहीं था सॉरी..

निखिल इसकी कोई जरुरत नहीं है, तुम हमारे दोस्त हो हमे तुम्हारी बात का बुरा नहीं लगता

कुछ देर बाते करने के बाद अमन चली गयी और निखिल निचे गार्डन में आ गयी, हर शाम वो बगीचे में आकर सभी पौधो को पानी देने और उनकी देखभाल करने का काम करता था......
उसे ये सब करके खुशी मिलती था, हॉस्टल में भी वो सबकी मदद किया करता था उसका व्यवहार ही ऐसा था की हर कोई उस से दोस्ती करना चाहता था......

लेकिन वो सबसे ज्यादा बात नहीं करता था, उसका मानना था की हर रिश्ता टूटने के लिए बना है, जरा सी गलतफहमी से रिश्ते धराशायी हो जाते है उसकी सोच ही उसे सबसे अलग बनाती थी......

अँधेरा होने पर निखिल वापस ऊपर अपने कमरे में चला आया...
खाना खाकर वो किताबे खोल कर बैठ गया और
पढ़ने लगा अमन खाना खाने के बाद बाकि के लड़को के साथ गप्पे लड़ाने बैठ जाया करता थी
10 बजे जब वो अपने कमरे में आया तो उसने देखा निखिल इत्मीनान से बैठकर पढ़ाई कर रहा है अमन उसके लिए कॉफ़ी बना लाया और उसके पास रखी चेयर पर बैठते हुए कहा .....

इतना मत पढ़ा करो यार, मुझे जलन होने लगती है
अच्छा छोड़ो ये लो कॉफ़ी पीओ- अमन ने कॉफ़ी का मग निखिल की तरफ बढ़ाते हुए कहा...

निखिल ने कॉफी ली और पिने लगा अमन अच्छा ये बताओ तुम क्या बनना चाहते हो...

निखिल- हम एक आई.ए.एस. आफिसर बनना चाहते
है हमारे पापा का सपना था दादी बताती थी की उनको भी पुलिस में जाना था लेकिन किसी वजह से नहीं जा सके लेकिन अब हम उनके सपने को पूरा करना चाहते है।

तुम जरूर पूरा करोगे अमन ने मुस्कुराते हुए कहा
और फिर दोनों अपने अपने बिस्तर पर सोने चले गये

अगले दिन फिर उसी सपने से निखिल के दिन की शुरुआत हुए.,
निखिल और अमन कॉलेज पहुंचे और अपनी अपनी
क्लास में चली गये, दोनों 2nd ईयर में ही थी लेकिन
सब्जेक्ट अलग होने की वजह से उनकी क्लास अलग अलग लगती थी,, निखिल जैसे ही क्लास में पहुंचा किसी ने कहा..

हेलो सर, कीधर

निखिल ने देखा टीचर की टेबल पर एक हट्टा कट्टा लड़का बैठा था और दो तीन लड़के उसके आस पास खड़े थे उसने बिना चेहरे के हाव भाव बदले सख्ती से कहा क्लास लेने आये है....
उस लड़के ने टेबल से उठते हुए साथ वाले से कहा तेवर तो देखो इनके, लोग मेरे सामने सर झुका के खड़े होते है....
साथ खड़े लड़के हसने लगे

निखिल आपके सामने सर झुका के खड़े होने वाले या तो आपसे कमजोर होंगे या फिर आपके चमचे, ना हम खुद को कमजोर समझते है न ही हमे सर झुकाने की जरुरत है"
निखिल ने उसकी आँखों में आँखे डालकर कहा
निखिल की बात सुनकर उस लड़के को गुस्सा आ गया उसने निखिल के करीब आकर कहा तुम शायद जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है?
निखिल आपका बाप कौन है ये हमे जानने की जरुरत नहीं तुम जानते हो तुम किस से बात कर रहे हो....
निखिल जी हाँ, एक आमिर बाप की बिगड़ी हुयी औलाद से कहकर निखिल अपनी सीट की तरफ बढ़ गया उस लड़के ने गुस्से में जैसे ही निखिल की तरफ बढ़ने की कोशिश की निरंजन सर क्लास में आ गए उन्होंने सबको अपनी अपनी सीट पर बैठने को कहा
पैर पटकते हुए वो लड़का अपनी सीट पर आ बैठा....

वो लड़का शहर के मिनिस्टर ओमकार का बेटा रवि अग्रवाल था, इकलौता होने के कारण उसकी हर जिद पूरी की गयी, इसलिए हर जगह वो अपने बाप की पावर के नाम से लोगो पर धौंस जमाता रहता था लेकिन निखिल ने आज उसको....
डांटकर उसके गुरुर को तोड़ दिया वो गुस्से में निखिल की तरफ देख रहा था, कृष्णा इतनी देर से ये सब देख रहा था उसकी हंसी नहीं रुक रही थी जैसे ही निखिल आकर बैठा उसने फुसफुसाते हुए कहा
वाह यार तुमने तो सबके सामने उसकी बैंड बजा दी
निखिल ने उसकी तरफ देखा और उसे सामने देखने को कहा

निरंजन सर ने पढ़ाना शुरू किया सभी एकाग्र होकर पढ़ने लगे लेकिन कृष्णा का ध्यान बोर्ड को छोड़कर सब जगह था वो एक बार गुस्से से भरे रवि को देखता और अब बार निखिल को देखता और हसने लगता... 
निखिल के साथ साथ रवि को अब कृष्णा पर भी गुस्सा आ रहा था.. तभी निरंजन सर की नजर कृष्णा पर पड़ी और उन्होंने कृष्णा से कहा
कृष्णा क्लास से बाहर जाकर खड़े हो जाओ....

कृष्णा तो यही चाहता था क्योकि उसे पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं था उसने मुस्कुराते हुए निरंजन सर से थक्यू सर कहा.....
और क्लास से बाहर जाकर खड़ा हो गया ।
निरंजन सर ने वापस पढ़ाना शुरू कर दिया, क्लास से बाहर निकलने के बाद भी कृष्णा को चैन नहीं था जिस खिड़की के पास निखिल बैठा था वो गेट के बिलकुल पास थी और कृष्णा भी वही खड़ा था, वो बड़ी उटपटांग हरकते कर रहा था,, ना चाहते हुए भी निखिल की नजर बार बार उस पर चली जाती उसने अपना ध्यान बोर्ड की तरफ लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन नहीं लगा पाया...
अचनाक निखिल की नजर खिड़की पर ही जम गयी कृष्णा अपने बैग को दोनों हाथो में पकड़े डांस कर रहा था.....
निखिल का ध्यान क्लास में ना होने के कारण निरंजन सर ने उसे भी क्लास से बाहर जाने को कह दिया,, निखिल चुपचाप क्लास से बाहर आ गया, उसने घूरकर कृष्णा को देखा तो उसने कहा हाय तुम्हे भी बाहर निकाल दिया, सर को होनहार स्टूडेंट्स की कोई कदर ही नहीं है उसने मुंह बनाते हुए कहा........

निखिल आप जानते है आपकी वजह से मेरा कितना नुकसान हुआ है, आप ऐसी हरकते क्यों करते है, जब पढ़ना ही नहीं तो फिर कॉलेज आकर अपना वक्त बर्बाद क्यों करते हो.....

कृष्णा - मुझे पढ़ना बिलकुल पसंद नहीं है वो तो बस पनिशमेंट के लिए पापा ने यहाँ भेजा है मुझे.....

निखिल लेकिन आप अपने साथ साथ दुसरो को पनिश क्यों क्यों कर रहे है हमारा कितना इम्पोर्टेन्ट लेक्चर मिस हो गया

कृष्णा लेकिन मैंने क्या किया?

निखिल आपने कुछ नहीं किया सब हमारी गलती है कहकर निखिल दिवार से पीठ लगाकर खड़ा हो गया।

कृष्णा ने निखिल की तरफ देखा वो गुस्से में और भी प्यारा लग रहा था, कृष्णा उसे देखता रहा और वो परेशान सा न जाने क्या बुदबुदा रहा था, कृष्णा ने उसकी तरफ कोल्डड्रिंक की बोतल बढ़ाते हुए कहा पि लो शायद तुम्हारा गुस्सा थोड़ा ठंडा हो जाये....

निखिल ने उसे घूरकर देखा और वहा से चला गया कृष्णा अब भी बेपरवाह सा वहा खड़ा कोल्ड्रिंक पि रहा था आज पहली बार निखिल को किसी पर गुस्सा आ रहा था, निखिल लायब्रेरी की तरफ चला गया उसे लेक्चर मिस होने का बहुत दुःख था लेकिन अब वो क्या कर सकता था, वो रॉ से कुछ किताबे निकालकर टेबल की तरफ आने लगा की किसी
से टकरा गया और सारी किताबे गिर गयी जैसे ही उनके उठाने के लिए निचे झुकी उसका सर सामने वाले से टकरा गया.....

उसने जैसे ही देखा सामने कोई और नहीं कृष्णा ही था "आप" उसने गुस्से से कहा
सॉरी उसने किताबे उठाते हुए कहा "आप यहाँ क्या कर रहे हो" निखिल ने उस से अपनी किताबे छीनते हुए कहा.....

"गाना गाने आया हु लायब्रेरी में लोग क्यों आते है पढ़ने तो पढ़ने ही आया हु by the way मेरे पास अभी बहस करने के लिए वक्त नहीं है कहकर कृष्णा वहां से निकल गया....

निखिल उसे देखती ही रह गया और सोचने लगा अजीब लड़का है...

उसे कृष्णा से खिन्न होने लगा वो जाकर टेबल पर बैठ गया कृष्णा भी आकर उसके सामने बैठ गया और पढ़ने का नाटक करने लगा, कुछ देर बाद एक लड़की आयी और कृष्णा से कहा एक्सक्यूज़ मी, क्या मैं यहाँ बैठ सकती हु....

कृष्णा ने लड़की को देखा जींस और टॉप पहने बालो को खुला रखे, होठो पर बड़ी सी मुस्कान लिए हुए थी...
कृष्णा ने निखिल को चिढ़ाने के लिए उसे हाँ कह दी वो उस से चिपककर बैठ गयी....

दोनों पढ़ाई से ज्यादा बातो में रूचि ले रहे थे.. निखिल को बार बार डिसट्रब हो रहा था इसलिए उसने उठकर तेज आवाज में कहा Can you please just keep quiet.....

कृष्णा और उस लड़की के साथ साथ सभी निखिल की तरफ देखने लगे लायब्रेरियन ने निखिल से शांत रहने का इशारा किया, निखिल फिर से किताब में देखने लगा लेकिन उसका ध्यान किताबों में नहीं था, कृष्णा जान बूझकर उसे परेशान करने के लिए ये सब कर रहा था...
निखिल वहा से उठकर चला गया, और कॉलेज में बनी भगवान की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और आँखे बंध कर भगवान से कहने
लगा हे ईश्वर हम नहीं जानते आज हमे इतना गुस्सा
क्यों आ रहा है हम शांत रहने की जितनी कोशिश करते है उतना ही मन अशांत होता जा रहा है.....

प्राथना कर निखिल सीढ़ियों की तरफ चला गया कृष्णा ने उसे प्रार्थना करते देख लिया था इसलिए निखिल के जाते ही वो मंदिर के सामने गया और बोला -उसने जो मांगा है वो उसे दे....
देना पर उस से पहले मेरी सुनो, उसे मैंने बहुत परेशान कियाहै और आगे भी करूंगा क्योकि वो बहुत अच्छा है, मुझे उस से मिलाने के लिए थक्यू... मुह्हह्हा...
कृष्णा वहा से चला गया.

निखिल घर आ गया आज उसका मन बहुत खराब था शाम को वो हॉस्टल की छत पर चला गया उसे ढूंढते ढूढ़ते अमन भी वही आ गया....

अमन क्या हुआ तुझे आज यहाँ कैसे तू तो यह कभी
नहीं आता "अमन ने आते ही सवालों की झड़ी लगा दी।

बस ऐसे ही आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा, निखिल ने बुझे मन से कहा

अमन जानता था निखिल इस जगह आकर खड़ा तभी होता था जब वो बहुत परेशान होता था या फिर दुखी निखिल का मूड चेंज करने के लिए अमन ने कहा अच्छा
सुन, वो जिस लड़के के बारे में कल मैं बात कर रहा था ना....

उसके बारे में बहुत कुछ जानकारी हासिल कर ली मैंने वो प्रतापगढ़ का रहने वाला है यहाँ किसी दोस्त के घर रहता है, उसके पापा ने पनिशमेंट के लिए साल के बिच में ही उसका इस कॉलेज में दाखिला कराया है, उसके पापा प्रतापगढ़ के जमींदार है बहुत ही सख्त मिजाज है...

निखिल तूम किस लड़के की बात कर रही हो निखिल ने समझ की स्थिति में पूछा....

अमन अरे वही कल जो नया आया था कॉलेज में
"कृष्णा"

निखिल वो, उस लड़के का तो तू नाम मत ले मेरी परेशानी की वजह वो ही है जानता है आज उसने क्या किया और उसके बाद निखिल ने कॉलेज की सारी बात अमन को बता दी

लेकिन अमन तो उल्टा कहने लगा हाय क्या किस्मत है तेरी जिस लड़के के पीछे लड़किया पागल हुयी घूम रही है वो तेरे पीछे घूम रहा है, काश तेरी जगह मैं होता.....

निखिल अमन
अमन हां निखिल

निखिल पता नहीं क्यों पर वो जब भी हमारे सामने आता है हम परेशान से हो जाते है, एक अजीब सी बेचैनी पता नहीं क्यों उसे देखते ही हमें गुस्सा आने लगता है....
अमन- यार वो कितना क्यूट है, उसे देख के तुम्हे गुस्सा आता है
निखिल - तुमसे तो बहस करना बेकार है, चलो खाने का वक्त हो गया है दोनों नीचे आ गये...

कॉलेज जाते हुए एक हफ्ता गुजर गया, नोकझोंक और हलकी फुलकी परेशानियों में निखिल कॉलेज जाता रहा कृष्णा उससे बात करने की बहुत कोशिश करता लेकिन वो हर बार उस से दूर चला जाता, अब तक उसके कॉलेज में कई दोस्त बन चुके थे, लेकिन निखिल ने उसके दिल में एक खास जगह बना ली थी....
वो निखिल को हमेशा परेशान करता रहता लेकिन दिल ही दिल में वो उसकी बहुत रिस्पेक्ट करता था अमन से भी उसकी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी......

एक सुबह जब निखिल कॉलेज पहुंचा तो उसे पता चला मैनेजमेंट ने सबके लिए एक फ्रेशर पार्टी रखी है.....

सभी बहुत एक्साइटेड थे कॉलेज खत्म होने के बाद निखिल और अमन घर आ गये अमन आज शाम को तुम क्या पहन कर जा रहे हो निखिल मैं कहीं नहीं जा रहा तुम चले जाना.....
अमन ठीक है तो फिर मैं भी नहीं जा रहा अमन ने बिस्तर पर गिरते हुए कहा

निखिल- अमन, मेरी वजह से तुम क्यों अपनी पार्टी खराब कर रहे हो.. तुम चले जाओ ना

अमन-  अगर जाएंगे तो दोनों साथ जाएंगे वरना कोई नहीं जाएगा

निखिल काफी देर सोचता रहा और फिर कहा- ठीक है हम भी चलेंगे,
अमन खुश हो गया ..
"अच्छा तुम जल्दी से तैयार हो जाओ 7 बजे हमे वहा पहुंचना भी है"

निखिल बाथरूम की तरफ बढ़ गया जब बाहर आयी तो अमन तो उसे देखता ही रह गया...

निखिल - तुम्हारी नौटंकी बंद हो गयी हो तो चले निखिल ने उसका कान खींचते हुए कहा

वार्डन से परमिशन लेकर वो दोनों हॉस्टल से बाहर आ गये कुछ ही देर में दोनों कॉलेज पहुंचे अधिकतर स्टूडेंट्स और टीचर्स आ चुके थे, सबने एक से बढ़कर एक शानदार कपड़े पहन रखे थे लेकिन उन सब में सबसे अलग लग रहे थे......
निखिल उसकी सादगी ही उसे ओरो से खूबसूरत बनाती थी दोनों अंदर हॉल में गये सबकी नजरे निखिल पर टिक गयी

अमन अपनी दोस्तों की तरफ चला गया, निखिल एक कोने में खड़ा हो गया तभी रूचि मैडम उसके पास आयी आज वो निखिल की तारीफ करती नहीं थक रही थी,, निखिल कुछ देर उनसे बाते करता रहा तभी गेट के सामने एक गाड़ी आकर रुकी गाड़ी से रवि अपने कुछ दोस्तों के साथ उतरा, और अंदर आया, कुछ लड़किया उसकी तरफ बढ़ी और फिर सब उस से बातचीत करने लगी, पर रवि की नजरे तो आज किसी और पर ही थी और वो था निखिल सब को साइड कर वो निखिल के पास आया और कहा उस दिन के लिए सॉरी....
निखिल - its ok
"बहुत खूबसूरत लग रहा था उसने एक
गुलाब निखिल की तरफ बढ़ाते हुए कहा"

निखिल ने फूल लिया और बिना कुछ कहे दूसरी तरफ चला गया उसने फुल एक फ्लावर पॉट में लगा दिया सब पार्टी एन्जॉय करने लगे, निखिल ने चारो तरफ देखा उसे कृष्णा कही दिखाई नहीं दे रहा था, तभी उसने पीछे से निखिल के कान में कहा "मुझे ढूंढ रहे हो निखिल ने घबराकर पीछे देखा कृष्णा मुस्कुराते हुए खड़ा था.....

"आप हमेशा ऐसी हरकतें क्यों करते हो उसके खीजते हुए कहा...
कृष्णा ने निखिल को देखा तो बस देखता ही रह गया, लेकिन अपनी भावनाओं को काबू में रखते हुए उसने कहा वैसे मैं तुम्हारे लिए फुल लाया था, अपनी आँखे बंद करो प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़

निखिल ने अपनी आँखे बंद कर ली और जब खोली तो कृष्णा उसके सामने "गोभी" का फूल लिए खड़ा था.....
निखिल कुछ कहता उस से पहले ही कृष्णा बोल पड़ा वो क्या है न जब तुम गुस्सा करते हो ना तो तुम्हारा मुंह ऐसे ही हो जाता है...
और निखिल को गोभी पकड़ाकर वहा से भाग गया.....
निखिल का मन किया उसी गोभी से मरकर उसका मुंह तोड़ दे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, उसने उसे साइड में रख दिया, उसके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी तभी एक लड़की आयी और निखिल को एक कागज पकड़ा कर चली गयी निखिल ने उसे खोला तो उसमे लिखा था

"आज की महफ़िल की रौनक सिर्फ तुम हो प्लीज़ स्माइल"

निखिल ने पढ़ा और इधर उधर देखने लगी पर सब अपने आप में बिजी थे निखिल को समझ नहीं आ रहा था की वो कागज किसने भेजा है, कुछ देर बाद अनाउंसमेंट हुयी और कुछ डांस करने के लिए हॉल में आ गए बाकि सब चेयर लेकर बैठ गए निखिल भी चेयर लेकर बैठ गया उसे डांस करने में कोई
रूचि नहीं थी, तभी एक अनाउंसमेंट और हुयी की सबको कपल्स में डांस करना है।

तभी अमित ने कृष्णा के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा आज अच्छा मौका है, अपनी राधा पर अपना जादू दिखाने का.....

कृष्णा खुशी खुशी निखिल की तरफ बढ़ गया वो जैसे ही निखिल के पास पहुंचा रवि ने निखिल की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा...
निखिल lets dance
निखिल-  सॉरी हमे डांस नहीं आता

इसका मतलब तुमने अभी तक मुझे माफ़ नहीं किया रवि ने निखिल की तरफ देखते हुए कहा.

रवि की बात सुनकर निखिल उसके साथ डांस करने चला गया दूसरी तरफ कृष्णा रवि के आने से कबाब में हड्डी जैसा महसूस कर रहा था, पर वो खड़े खड़े दोनों को डांस करते हुए देखता रहा तभी अमन वहां आया और उसे अपने साथ डांस करने के लिए ले गया कृष्णा था तो अमन के साथ पर उसकी नजर बार बार निखिल की तरफ जा रही थी अमन को
समझ आ गया उसने जानबूझकर टर्न किया और निखिल का हाथ पकड़कर खुद रवि की तरफ चला गया और निखिल को कृष्णा की तरफ कर दिया, कृष्णा ने आँखों ही आँखों में अमन  को थंक्यू कहा....

अब निखिल कृष्णा के साथ था कृष्णा बस उसकी आँखों में देखे जा रहा था,,

डांस के बाद सभी खाना खाने लगे निखिल सिर्फ वेज खाते थे इसलिए वो अकेले ही खा रहा था बाकि सभी वेज नॉनवेज सब खाने में लगे थे निखिल खा ही रही थी की तभी कृष्णा आया और उसकी प्लेट में मीठा रखते हुए कहा मीठा खाया.....
करो ताकि तुम्हारी जबान भी थोड़ी मीठी हो जाये बोलकर वो चला गया, निखिल गुस्से में उसे देखता रहा तभी वो पलटा और निखिल की तरफ देखकर बड़ी सी स्माइल देकर चला गया.....

खाने के बाद एक बार फिर सब हॉल में जमा थे,, प्रिंसिपल ने सबको बधाई दी और कहा आज की इस शानदार पार्टी की समाप्ति होगी निखिल के गाने से होगी.....

सबने जोरदार तालिया बजायी और निखिल की तरफ देखने लगे निखिल को कुछ समझ नहीं आया उसने तो आज तक नहीं गाया वो चलकर प्रिंसिपल के पास आया और उनसे कहा सर माफ़ी चाहते है, पर हमने आज तक कभी नहीं गाया है, हम नहीं गा पाएंगे

"लेकिन उसने तो कहा तुम बहुत अच्छा गाते हो, और तुम्हें बहुत सारे अवार्ड मिल चुके है गाने के लिए प्रिंसिपल ने कहा

"किसने निखिल ने चौंकते हुए कहा
प्रिंसिपल ने कृष्णा की तरफ इशारा करते हुए कहां जो को कुछ ही दूर खड़ा मुस्कुरा रहा था..

निखिल ने अपना सर पिट लिया प्रिंसिपल ने निखिल से गाने को कहा और दूसरी तरफ चला गया सभी लाईट डिम कर दी।
गयी बा एक फोकस था सिर्फ निखिल पर उसने हाथों में माइक पकड़ा हुआ था, उसका दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था उसने अपनी आँखे बंध कर ली.....
और गाना शुरू किया

हो चांदनी जब तक रात देता है हर कोई साथ
तुम मगर अंधेरो में, ना छोड़ना मेरा हाथ
जब कोई बात बिगड़ जाये
जब कोई मुश्किल पड जाये
तुम देना साथ मेरा ओह हम नवा

निखिल की आवाज इतनी खूबसूरत थी की सब अपना अपना  दिल थामे उसको सुन रहे थे, अचानक वो गाते गाते रुक गया उसने आँखे खोल ली सब उसकी तरफ देख रहे थे अमन
ने कहा निखिल कंटिन्यू बहुत अच्छा गा रहे हो निखिल भूल गया...

तभी भीड़ में से गाने की आवाज आयी

दिल को मेरे हुआ यकीन,
हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का
कोई आज की बात नहीं

लाइट का फोकस आवाज की तरफ गया कृष्णा माइक हाथ में लिए हुए था सब हूटिंग करने लगे तभी कृष्णा ने निखिल की तरफ बढ़ते हुए आगे गाना शुरू किया....

ना कोई है, ना कोई था
जिंदगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओह हम नवा
तुम देना साथ मेरा अह्ह्ह हमनवा

उसके बाद सबने उनके साथ गाना शुरू कर दीया,, वो पल उस रात का सबसे खूबसूरत पल था निखिल भी अपना गुस्सा भूल गया पार्टी खत्म हो चुकी थी सब अपने अपने घर के लिए निकल गए.....