Monday, 16 July 2018

आखिरी सफ़र

जग जाओ न अब। आधे घंटे से तुम्हारे खर्राटे सुन रहा हूँ...
निखिल ने ईयरफोन की माइक ठीक की और नींद से भारी पलकों को खोल मोबाइल में समय देखा सुबह के आठ बज रहे थे

"उठ जाएंगे बाबू अभी तो सोये हैं, अलसाई सांसो से भरी
खामोशी की एक अंतराल के बाद विकास ने कहा "

प्लीज जाग जाओ  ट्रेन है दस बजे से। निखिल  ने हठ किया......
मगर इस से बेअसर विकास शोख हुआ,"जग जाएंगे,
अगर तुम प्रोमिस करो यहाँ से जगाओगे तो अपने पहलू में
सुलाओगे?
उसकी उन्नीन्दी सांसे निखिल के रगों में सिहरन उलीच रही थी।
पर उसने बनावटी गुस्से में कहा
"बस करो मुझे पता है तुम पहलू से निकलोगे तो कहाँ कहाँ
बहकोगे
"अरे आपकी जवानी, महुए का पानी। हम कैसे न इधर उधर
बहकें," विकास आसानी से मानने वालों में से नही था।

"ठीक है फिर तुम देखो कैसे महुए की पानी,नीम की पानी
बनता है। टिकट कैंसिल कर रहे हैं तुम्हारा अकेले आना",निखिल ने फोन रख दिया, सच में देर हो रही थी ।

फोन कटने के साथ विकास ने घड़ी देखा साढ़े आठ बजे गए।
थे। वो टॉवल लिए बाथरूम भागा।

कॉलेज जब शुरू हुआ था तो सीधा साधा मूरत लगता था
निखिल का ठहर ठहर के बोलना और खुद में खोये रहना ही उसका
शगल था। ऐसा लगता था एक सन्नाटा गुजरा है उससे होकर
और वो उससे उबर नही पाया हो। पर कॉलेज में आने पे इस
शून्यता और सन्नाटे की बर्फ़ पे जाने अनजाने कोई ताजे पानी
की फुहारें मारने लगा था। माइनस सोलह डिग्री सेल्सियस
जीरो डिग्री सेल्सियस की गर्मी से पिघलने लगा था।

क्लास में जब वो बैठता तो पीछे के बेंच से एक झीनी सी छन
की आवाज आती और उसकी आँखें खुद ब खुद उधर खींची
चली जाती। एक लड़का बैठता था, अंत की पंक्तियों में, कसी
पैंट और कमर के नीचे शर्टिंग हुई शर्ट पहने। उसकी कलाई में
मोटे चेन की घड़ी और ब्रेसलेट थी।अक्सर लिखते लिखते
जब वो थकता तो हाथों को जुम्बिश देता फिर ब्रेसलेट और
घड़ी आपस मे छन की आवाज से आवाज से टकराते।
आहिस्ते आहिस्ते यह आवाज उसकी कमजोरी बनती चली
गई। छन की आवाज पे मुड़ जाना एक अनकही रीत बन गई
उसकी।

बदस्तूर दिन महीने बीत के साल होते गए। वो लिख के थकता
रहा, कलाई हिलती रही छन्न की आवाज आती रही वो मुड़ता
रहा मगर उससे आगे कुछ न हुआ।।
न वो पहल करता न ये राब्ते की कोशिश। शायद दोनों को
ज्ञात था कि मिलना उनकी नियति है। इसलिए वो चुप थे
कोई जल्दबाजी नही था।
समय आया, वो मिल भी गए और रफ्ता रफ्ता आहिस्ते
आहिस्ते और घुलते गए एक दूसरे के रंगों में । ये मिलन
प्राकृतिक था मानवीयता रत्ती भर नही था इसमें । न कोई
बनावटीपन।

निखिल ने एक बार पूछा भी था क्या तुम मुझे कभी ऐसे इजहार
(प्रपोज) नही करोगे? जैसे और लोग करते हैं? जैसे फिल्मों में
करते हैं?
तब उसने कहा था अगर हिंदी में मुझे," तुमसे प्यार है,
इंग्लिश में "I LOVE YOU"
कह देना ही प्रपोज है तब तो कतई नही। इजहार आंखों से
झलकना चाहिए और लहजे से गुज़र दिल में उतरते चले
जाना चाहिए।
वो चुप हो गया उसकी गहरी बातें अक्सर चुप कर देने वाली
होती थी।
उसका एक ही सिफत था, फ़क़त इश्क़, फ़क़त इश्क़, फ़क़त
इश्क़, सिवाय इसके कुछ भी नही
वो जो भी कहता वो इश्क़ था, जो भी करता वो इश्क़ था।
उसके सामने आते वो ऐसे लगता जैसे नवरात्रि में उड़हुल
फूल; साधारण पर, सबसे ख़ास,सबसे विशिष्ट, सबसे जुदा,
सबसे अलहदा।

वो समझ नही पाता उसे महसूस कर के वो क्या हो जाता। यूँ
लगता जैसे वो हवा में उड़ता हल्का फुल्का सोनचिरैया हो जो
बस नभ में विचरते जा रहा हो पंख फैलाये।
बचपन से ही उसकी माँ नही थी। उदास खोए खोए रहना
उसके जिंदगी की रवायत हो गई थी मग़र विकास ने सब
बदल दिया था। जिंदगी प्रेम के नाजुक सुरों में गूंथ दी थी।
उसने।
वो उससे प्रेम करता और उसे आह्लादित कर देता।निखिल के
पास देने के लिए कुछ नही बचता। वो चुप बस उसे निहारते
रहता। कितना मजबूत और खुशमिजाज था वो ।
कभी कभार साथ घूमते वक्त जब वो अपना हाथ उसके कंधे
पे रखता तो ऐसा लगते मानो वक्त ने सिमट के उसके कंधे पे
ठौर ले लिया हो। उसके प्रेम में वैराग्य था। जिस्म नगण्य था
रूह प्रधान थी।। इतना मुहब्बत पाकर वो डर जाता उसे कभी
इतना प्रेम अपने जीवन मे नही देखा था।

अगले तीन साल ऐसे बीते की कभी महसूस ही नहीं हुआ
साल में 365 दिन होते हैं।
उसके संगत में वो कब सीधी साधी मूरत से बातूनी चंचल
मशीन होता चला गया पता ही नही चला।
पढ़ाई ख़त्म हो गई अब जॉब की बारी थी। उसे जॉब नही
करना था।
विकास का कैम्पस प्लेसमेंट हो गया था
कॉलेज से जाने में तीन दिन बचे थे। वो निखिल  से मिलने आया
।। बातें होने लगी निखिल  ने पूछा
अब बताओ अपने फ्यूचर का क्या होगा शादी करोगे
मुझसे?
वो बस मुस्कराया फिर छेड़ते हुए बोला,"नही ,बिना शादी
किये दर्जन भर बच्चे होने का कोई तरीका हो तो बताओ वहीं
करेंगे।

"धत पागल" निखिल  ने हंसकर उसे मुक्का मार दिया। दोनो।
हंसने लगे।
उसने बताया कि वो पापा से बात करेगा।
और अपने होस्टल चला गया निखिल  बाहर रहता था वो अपने
फ्लैट चला आया।
रात के दस बजे निखिल  ने कॉल किया तो उसका फ़ोन व्यस्त
जा रहा था। ग्यारह बजे भी व्यस्त बारह बजे भी व्यस्त ।
थक हार कर उसने उसके माँ के फ़ोन लगाया वो भी व्यस्त
थी। निखिल  समझ गया। उसने फोन करना बंद कर दिया साढ़े
बारह के आसपास उसने कॉल किया। बेहद थका और ऊबा
लग रहा था। किसी अनजान डर से डर के निखिल  ने बिना देर
किए उसे अपने पास बुला लिया।
8 घण्टे पहले जिसके पास भर होने से वो खुद को महफूज
समझता था अभी बेबस कटे हुए पेड़ की तरह लग रहा था।
मिलते ही वो उससे लिपट के सिसकने लगा," निखिल
हम भागकर शादी कर लेंगे। जेंडर  का कोई मतलब नही
होता ,
Love dosent know gender....
एकाध साल बाद मम्मी पापा मान जाएंगे।
निखिल ने उसे खुद से भींच लिया। वो बच्चे की तरह सिमटता
चला गया। प्यार  की खासियत होती है, माँ बनने के लिए
उसे बच्चे और उम्र की आवश्यकता नही होती है। बस
परिस्थितियाँ होनी चाहिए वो अपने पिता की भी माँ बन
सकता है। और निखिल  तो माँ के जाने के बाद से ही अपने टूटे
हुए पापा की माँ बन गया था
आज भी वो माँ बन गई अपने प्रेम की और वो बच्चों की तरह
लिपट के उससे रोता रहा और वो उसके बालों को सहलाता
रहा उसे जिंदगी की हकीकत समझाता रहा। माँ बाप की
अहमियत बताता रहा। वो जानता था माँ के होने के मायने
क्या हैं।
उसने खुद से शादी को मना कर दिया। वो जिद करता रहा
वो उसे निष्ठरता से ऐसे समझाता रहा जैसे उनका इश्क़ कभी
शादी के लिए बना ही न हो।
सुबह हो गई दोनो सो गए।निखिल ने उसे सहज कर दिया।
कल होके उन्हें घर निकलना था। दोपहर को वो होस्टल चला
आया ।पूरी पैकिंग बाकी थी। रात भर पैकिंग करता रहा सुबह
4 बजे सोया मगर आठ बजे उसका फ़ोन आ गया स्टेशन आने
के लिए। उसका जगने का मूड नही था पर निखिल  की बातें वो
काट नही सकता था।

दस बजने में दस मिनट बाकी थे वो भागते हुए प्लेटफार्म
आया । वो बोगी के बाहर खड़े उसका इंतजार कर रहा था।
दोनो साथ बैठ गए। रास्ते भर बीते कल की बात होती रही।
वो आगे के बारे में कुछ सुनना नही चाहता था और वो सुनाना
नही चाहता थी। बारह घण्टे के सफर में दोनों पुरानी यादों को
जिंदा करते रहे। वो चाहता था एक और कोशिश करना मगर निखिल ने साफ मना कर दिया। अगली सुबह दोनों गंतव्य पे
आ गये थे। स्टेशन से उतरते वक्त निखिल  ने अपना अपना पैंडेंट
उतारकर उसके गले में डाल दिया। उसने भी अपना ब्रेसलेट
खोल कर उसके हाथों में डाल दिया।निखिल चाहता था एक
बार उसके बाहों में जकड़ जाए। वो पकड़ भी जाता स्टेशन
पर खड़े तमाम लोगों की परवाह किये बगैर, पर उन लोगों में
उसके पापा भी थे। वो चुपचाप बाहर खड़े कार में आकर बैठ गया.....

रात के दस बज रहे थे रेडियो पे RJ सायमा ने पुरानी जीन्स
में लता मंगेशकर का गाना लगाया हुआ था......"हम भूल गए
रे हर बात मगर तेरा प्यार नही भूले" वो धुआँ धुआँ होने लगा
पापा सवाल पे सवाल पूछ जा रहे थे वो बस  हाँ किया और आँख बंद कर ली...
उस के हाथ कस कर ब्रेशलेट को पकड़े हुये थे फिर पकड़ ढीली हुई निखिल जा चुका था  हमेशा के लिए.....

दोस्त को आने का मैसेज कर विकास वहीं स्टेशन के खाली
पड़े बेंच पर बैठ गया था। विकास ने गले मे पड़े पेंडेंट को चूमा और वही आंखें बंद कर दी दोस्त आ चुके थे  विकास के
वो उसे जगा रहे थे पर वो नहीं जगा  उस  वक्त उसके हाथ
से घड़ी गिर गयी।
शोर में शायद छन की आवाज दब गई या
इस बार घड़ी बेमतलब की छन करना नहीं चाहती थी।

Sunday, 24 June 2018

इकतरफा इश्क.....

मेरी शायरी से मुतास्सिर था वो इसलिए उर्दू सब्जेक्ट चुना था उसने अपने पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए और जान बूझकर मेरे
ही कॉलेज में मुझसे पढ़ने आया था वो ऐसा उसने खुद मुझे बताया था पहली क्लास में इंट्रोडक्शन के दौरान ये तो मुझे.....
मालूम था कि इंटरनेट पर मेरी शेर ओ शायरी को पसंद करने
बालों की लंबी लिस्ट है लेकिन कोई लड़का इस तरह मुझको
ढूंढते हुए खुद मुझको ही पढने आ जाएगा कभी सोचा नहीं था.....
हैरत भी थी और एक अजीब सी खुशी भी शायद, मैं खुद समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ये है क्या?
खैर पूरी क्लास में इस बात को ज़ाहिर करके वो लड़का मेरी
नज़र में चढ़ तो ज़रूर गया था यही कोई तकरीबन  17
बरस का था चेहरे पर संजीदगी लिए बड़ी बड़ी नीली आंखे
और साफ रंगत वाला, उसका नाम भी बड़ा खूबसूरत सा था
"आजेहा” उसी तरह उसका नाम भी जुदा सा था कुछ
तो बात थी उसमें के मेरे ज़हन के किसी कोने में ठहर सा गया था वो

तकरीबन १० बरस से मैं उर्दू का प्रोफेसर था अपने कॉलेज में....
हमेशा से स्टूडेंट्स के साथ संजीदा लेकिन दोस्तों के साथ
खुशमिजाज़ रहना मेरी आदत थी
कभी भी ऐसा नहीं हुआ
था के किसी भी स्टूडेंट्स के साथ क्लास के बाद या पढाई के
अलावा कोई राबता मैंने रखा भी हो।

लेकिन ये लड़का शायद मेरी ज़िन्दगी में उथल पुथल मचाने
को ही आया था | तभी क्लास के बाद भी मुझे ढूंढते हुए मेरे
डिपार्टमेंट में आ धमका सालाना जलसे में एक play करने
की मुझे ज़िम्मेदारी मिली थी ये बात पता करके वो play में
role मांगने आया था।

मुझे फिर हैरत में डाल गया था वो, मैं भी अजीब कशमकश
में था, उसको मना नहीं कर पाया बल्कि, play में उसको
role दे दिया मैंने इस बहाने अब वो रोज़ क्लास के बाद मेरे
सामने आने लगा, मुझसे बाते करने के मौके तलाशता।

उसका आना मुझे अच्छा लगने लगा था, मेरी टेबल तो करीने
से लगाता था वो और मुझे चाय भी बना के पिलाने लगा था,
जैसे मेरा ख्याल रखना उसका फ़र्ज़ हो, ऐसे वो मेरी जिंदगी में
दाखिल हुए जा रहा था।

मैं चाह कर भी उसको नज़रंदाज़ नहीं कर पा रहा था| अक्सर
तन्हाई में जब उसका ख्याल आता था तो ये सोच के झटक
देता था के एक स्टूडेंट और टीचर के बीच कोई ताल्लुक पढाई
के अलावा नहीं होना चाहिए, और तो और वो मुझसे उम्र में
भी काफी कम था, तकरीबन १२ साल छोटा था वो मुझसे

पर उसका रोज़ मेरे पास आना, मेरा ख्याल रखना, मुझे मेरी
खुद की बनाई हद लांगने पर मजबूर कर रहा था मुझे ये.....
नहीं मालूम था के वो ऐसा क्यू कर रहा था, क्यूंकि उसने
कभी कुछ लफ़्ज़ों से ज़ाहिर नहीं करा था, लेकिन वो जो कुछ भी कर रहा था, उससे  मुझे ये एहसास ज़रूर हो रहा था के
उसकी ज़िन्दगी में मेरी काफी एहमियत है।

दिन यूँ ही बीतते गये, तकरीबन ६ महीने हो चुके थे इस
सिलसिले को, और अब मेरा दिल बे इख्तियार हो चूका था,
मुझे अजीब सी कैफियत होने लगी थी, मैं उससे दूर भागना
चाहता था, क्यूंकि मैं अपने दिल को काबू में करने की तमाम कोशिशे कर चूका था, लेकिन मेरा न मुराद दिल उसकी और खिंचा जा रहा था|

इक रोज़ मैंने इरादा कर लिया के आज तो मैं, उसको बोल ही दूंगा,
के मेरे दिल में उसके लिए एहसासात जाग चुके हैं, मेरे
लिए वो special है, और ये बात कहना अब बोहत ज़रूरी ।
हो चूका है इसलिए मैं कह रहा हूँ, लेकिन अगर उसके दिल में
चाहत नहीं है तो कोई बात नहीं मेरा दिल बगैर कहे अब नहीं रह सकता था इसलिए मैंने कहना मुनासिब समझा।

दो चार दिन इसी टेंशन में रहा के कैसे ये बात उस तक पहुँचाई जाये|
मैं प्रोफेसर वो स्टूडेंट ऐसा कभी नहीं होता था के ।
डिपार्टमेंट में हम दोनों अकेले बैठे हों, इसलिए काफी सोचने
के बाद एक रोज़ सुबह मैंने एक audio रिकॉर्ड करा अपने
मोबाइल पे जिसमे मैंने अपनी सारी बेकली बेक़रारी और
उलझन बयां करदी, साथ ही ये भी कह दिया के अगर वो
accept नहीं करता है मेरी चाहत तो कोई बात नहीं

रिकॉर्ड करने के बाद मैं कॉलेज पहुंचा और उसके आने का
इंतज़ार करने लगा, हमेशा की तरह वो आया और जैसे मेरा ख्याल रखता था सब वैसे ही कर रहा था, क्यूंकि हम तनहा नहीं थे इसलिए समझ नहीं रहा था के उसको audio कैसे
सुनाऊ

जब मैं घर के लिए निकलने लगा तो मैंने उसको आवाज़ देके गेट पे बुला लिया, और उसको मोबाइल पे अपना audio on करके headphones लगा के सुनने को बोला| उसने
थोड़ी हैरानी से मेरी और देखा फिर फर्माबरदार बच्चे की तरह headphones लगा के सुनने लगा| जितनी देर वो सुन रहा
था मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था जैसे तैसे वक़्त गुज़रा
और वो ५ minute की audio ख़तम हुई होगी लेकिन वो
अपनी जगह से हिला ही नहीं, जहाँ बैठा था जैसे बैठा था,
बस बैठा ही रहा, जैसे मानो अभी भी audio चल रहा हो।

मैंने घडी देखि तो मुझे यकीन हो चला था के audio ख़तम
हुए कुछ वक़्त गुज़र चूका है, तो मैं धीरे से उसके नज़दीक
पहुंचा उसको पुछा, “सुन लिया न?" वो नज़रे झुकाये बैठा
था, कुछ नहीं बोला| मैंने फ़ोन उसके हाथ से ले लिए, फिर
कहा, “कुछ कहोगे?"

वो धीरे से बोला, "मेरी कुछ समझ नहीं आया"

उसकी ये बात मुझे समझ नहीं आई थी, मेरा दिल बेसाख्ता
धडके जा रहा था, मेरा खुद पर से इख्तियार न छूट जाये मैं
बस वहां से तुरंत निकल जाना चाहता था, इसलिए मैं सिर्फ ये
कह के चला आया, बस... इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह
पाउँगा, अब तुम सोच के बता देना”

वो वही बैठा रह गया और मैं खुद की रूह शायद वहीं छोड़ के आगया था .......

इतनी बेचैनी, इतनी कैफियत, के उफ़... बयां करना मुश्किल
था, रस्ते भर मैं किस अज़ीयत से गुज़रा मैं ही जनता हूँ।

दिमाग जैसे काम करना बंद कर चुका हो, बस दिल हावी था..
"वो क्या सोच रहा होगा? ये मैंने क्या किया? क्या मैंने ग़लत
किया? क्या सही किया बता कर? उसने ऐसा क्यूँ कहा, के
मुझे समझ नहीं आया? क्या वो समझा नहीं? या न समझने
का बहाना कर रहा है? मैंने तो साफ साफ लफ्जों में अपनी
बात रख्की थी फिर वो क्यूँ नहीं समझा? कहीं उसने इसलिए
तो ये नहीं कहा के मैं बुरा न मान लू अगर वो इंकार करे तो?"

जाने कितने सवाल मेरे ज़हन में हल्ला मचाए हुए थे, मेरे दिल
में तूफ़ान उठा हुआ था, सांसे तेज़ थी, और पसीने से मैं तर

घर पहुंचा तो हमेशा की तरह चेहरे पे मुस्कराहट आज नहीं
थी, बल्कि अजीब उडा उड़ा सा मैं घर में दाखिल हुआ था।
मुझको मेरी हालत का एहसास मेरी माँ ने कराया, ये पूछ कर
के, "क्या हुआ बेटा, आज तबियत नहीं ठीक है क्या?"

मैंने उनके सवाल को टालते हुए हाँ में सर हिला दिया था।
और चुप चाप अपने कमरे में जा के लेट गया था। इसी सोच
|में गुमसुम कब मैं नींद के आगोश में चला गया मालूम नहीं।

माँ ने भी मुझे ये सोच के नहीं उठाया के शायद मुझे थकन हो।
गयी है और सो के मेरी तबियत बहतर हो जाएगी।

शाम तकरीबन ६ बजे मगरिब की अज़ान से मेरी आँख
खुली आँख खुलते ही फिर उसका ख्याल हावी हो गया,
"उसने क्या, सोचा क्या" कहा ये जानने के लिए मोबाइल
की स्क्रीन पे हाथ फेरा तो देखा उसका एक sms पड़ा था|
लिखा था "आपकी बात का जवाब आपकी ईमेल पे भेजा

मैंने फ़ौरन ईमेल के icon पे क्लीक किया, देखा उसके
मेसेज के साथ एक अटैचमेंट था, इमेज फाइल थी, बगैर कुछ।
सोचे मैंने उसपे क्लीक कर दिया, ५ सेकंड लगे होंगे उसको
डाउनलोड होने में लेकिन ये ५ सेकंड ५ बरस जितने थे उस
वक़्त इमेज खुलते ही मेरी नजरो के सामने दो चेहरे थे,
एक वो था और उसके साथ एक उसी की उम्र का नौजवान।
तस्वीर देख के सब साफ हो गया था, बगैर सुने बगैर कुछ
बोले, मेरी बात का जवाब दे दिया था उसने|

मैं निशब्द काफी देर तक उस तस्वीर को ताकता रहा। मेरे
दिल में अजीब सन्नटा सा पसर गया था| ज़हन में अँधेरा फैल
गया था और जुबां खामोश थी| कोई लफ्ज़ कोई ख्याल कुछ
भी नहीं आ रहा था|

काफी देर बाद जब हवास वापस आए तो ईमेल के रिप्लाई बटन पर क्लीक किया और लिख दिया,
Its OK...I am
Happy for You!"
और ये पुख्ता करने के लिए के मैं वाकई में खुश हूँ एक smiley भी ऐड करदी  sent बटन पे क्लीक
करके मैं फिर लेट गया... और बस अपने खुदा से एक सवाल
किया... के “अरसे बाद ज़िन्दगी में मुहब्बत लानी ही थी तो
इकतरफा क्यूँ...??"

Tuesday, 19 June 2018

Bahut Arzoo Thi Gali Ki Teri.....

Beta gate kholo mai hu tumhari mammi hu....
Kholta hu mammi(rahul ne kaha)
Rahul ne gate khola aur kaha aao mammi kaise ho aap....

Mai theek hu tum btao beta kaise ho....
Mai bhi theek hu mammi.....

Beta kb tk rahega yahan yun akele bhool ja 2 saal ho gye hai....

Nhi mammi ab akele jyada achcha lgta hai.....

Mammi shaam tk ruki fir chali gyi....
Mammi ne aaj fir yaad dila diya tha wo....

Achanak anshu aa gye the....
Na jane kyu jb jb wo din yaad aata hai to ro hi padhta hu.....
2015 may...
Hmare shehar me ek private engineering collage hai....
N.M.N engineering collage....
Wahi admission liya tha 12 ke baad hmare collage me meri puri toli thi.......

12 may 2015...
Yahi tha wo pahla din jb maine use dekha tha rang gora baal thode bade aur bhikhre the.....
Mujhse puchcha suniye ye admission wing kahan hai.....
Maine kaha right straight nd then two left.....
Wo chala gya pr mujhe bahut ghoor kr dekh rha tha......

Din beet gye admission ho chuke ab nmbr tha padhai ka aur classes ka meri branch mechanical thi....
3 july ko jb collage aaya to dekha wahi ladka pahle se class me tha wo mujhe dekh kr sakpaka gya tha......
Baki sb bhi aane lge the...
Class me bhi ghoorta hi rha......
Waise bhi fact hai aap so rhe ho agr aap ko ghoore to pta chal hi jata hai.....
Mai itna dhyaan nhi diya....

Dheere dheere notice krna hi pada ek din khud hi puch liya kya baat hai itna kyu ghoorta hai.....
Usne kaha kuch nhi bs aise hi aapse dosti krna chahta mai yahan naya hu.....
Usne kaha mera naam aman hai aur apka maine kaha rahul....
Maine puchcha yahan kahan rahte ho....
Usne btaya new af colony me....
Maine kaha ohk....
Mai use bye bol kr apne dosto ke sath nikal gya....
Pr aman wahi khada rha tha....
Dheere dheere hi hello hone lgi....
Collage ke bahar hi ek cigarette ki dukan thi wahan mai cigarette peeta tha.....

Mai collage ke khat hone ke baad aksar wahan baithta tha....
Aman apni scooty se smile krte huye nikal jata tha.....
Kbhi kbhi mere dost puch bhi dete the kon hai ye yr tujhe dekh kr bahut smile krta hai class me ghoorta rahta hai tujhe.....
Maine kaha dost hai.....
Meri aur aman ki kaafi achchi bn ne lgi thi.....
Abhi sirf do mahine hi huye aur hm achche dost bn gye....
Mai use ek class bunk kr ke collage ki terrace pr le gya.....
Aaj mausam achcha tha shayad barish hone wali thi....

Upar koi ata jata nhi tha.....
To mai cigarette pee rha tha aur wo mujhe dekh rha tha.....
Hm log jyada baate nhi krte the....
Wo koi gana gun guna rha tha....
Dikhai diye yun bekhud kiya.....
Achanak barish hone lgi aman aur mai shed ki taraf bhage.....
Pr aman to barish me naha rha tha...
Maine bhi apna bag rakha aur nahane chal diya....

Aman maano barish ki boondo ke sath athkheliya kr rha ho....
Hm barish me takra rhe the.....
Achanak aman pair fislne ki wajah se gir gya mai uska hath apne kandhe me rakha kr shed me le aaya....
Hm dono bheeghe huye the na jane kb hm dono aapa kho baithe pta hi nhi kb hm wo sb kr baithe......
aman sharmate huye neeche chala gya....
Mai wahi khada rha ki ye maine kya kr diya....

Mane bag uthaya aur seedhe bheegte huye ghr ki taraf bhaga aman meri taraf dekha bhi maine dhyaan nhi diya.....
Us din ke baad mai 2 hafte baad collage gya....
Aman samne baitha tha maine us se nazre churate huye baith gya....
Aman ka muh latak gya tha....
Class khatam hone ke baad mere dosto ne kaha tera ashiq tere baare me kitna puchchta hai.....
Maine chilla kr bola kya ashiq ashiq lga rkha hai.......

Itna keh kr mai bahar chala aaya....
Lekin jb bhi mai aman ko nazre bachakr dekhta wo has deta uski ye hasi meri jaan le rhi thi ghinn aa rhi thi mujhe apne aap se ki ye kya ho gya.....
Maine ek din aman ko terrace pr bulaya aur kaha.....
Aman jo bhi hua use bhool jaao wo glti thi meri....
Jo hua masti me hua....
Usne kaha i love u rahul....

Mai chilla kr kaha mai chhakka nhi hu mai jo ek ladke se pyaar karu.....
Ja ke apni shakal dekh....
Wo rote huye bhag kr chala gya tha us din....
Us din ke baad wo kbhi collage nhi aaya....
Dusre din collage aaya to uski seat khaali thi...
Maine mn me socha achcha hi hai na aaye....

Dheere dheere din beet rhe the aur uski kami bhi khalne lgi thi....
Ek din collage ke bahar cigarette ki dukan pe baitha tha lga ki wo muskurate huye nikla pr nhi mera vaham tha....

Shayad mujhe bhi us se pyaar hone lga tha....
Pr itna sb kuch bol diya tha usko kitni galiya di thi.....
Maine wo sb bola tha jo puri zindangi nhi bhool sakta tha.....

Pr apni glti ka paschtaap ho rha tha mujhe....
Kuch din aur beete mere dil me aman ke liye pyaar jaag chuka tha....
Maine apni mammi ko phone pe sb bta Diya tha.....

Maine ye than liya tha ki us se maafi mangunga aur maaf nhi karega to pair pe gir jaunga pr mera mn bol rha tha mera aman mujhko maaf jarur krega....
Mai apne pyaar ka viswas dilaaunga.....

Samne mere aman ka ghr tha
11 se 1 baj gya tha pr uske ghr jane ki himmat nhi ho pa rhi thi....
Tbhi rone ki awaaz sunai....
Maine ek ladke se puchcha kya hua usne btaya inka ladka bahut beemar tha....
Mai daudte huye andar ghus gya dekha to aman  apni sanse chhod chuka tha....
Mai ro ro kr zameen pr baith gya aur mere anshu na jane kyu ruk hi nhi rhe aaj kisi ko mohhbbat me marte dekha hai.....
Mere aman ko le jane ki tyaari ho rhi thi.....
Mera aman ja rha tha mai us se maafi bhi nhi maang paaya shayad mai ab kbhi maaf nhi kr paunga jb maine ek insaan ko wo wo bola hai jo kbhi kisi ko nhi bolna chahiye....
I love u aman
Mere anshu ruk hi nhi rhe the......
Tbhi dukan wale ki tv  se ek gana bajne ki awaz aayi jo aman us din gun guna rha tha....

Bahut arzoo thi gali ki teri to yase lahu me naha kr chale.....
dikhayi diye yun bekhud kiya hme apse se juda kr chale.............

Sunday, 28 January 2018

Arranged marriage

Ma ne kaha ladke wale milne aa rhe hai ha milna utna chubta nhi jitna dekhna....

Shaam ho gyi thi ladke wale aa gye the shakti ki ma ne mujhe dekhte hi kaha 8 saal ke the jb dekha tha hme kya pta tha tum hi ghr aaoge...

Kareeb 20 minute baad hm amne samne the shakti ek saumya saksiyat ke dhani vyakti the shakti apni ma ke haath se jhoothi plate aur apni jhoothi plate kisi ko dena nhi aur mere papa se uchi awaaz me baat na krna ye sabit krta tha ki zindangi ki itni utaar chadaw ke baad bhi magroor nhi hue the shakti...

Na jane kyu shakti ki yahi adat mujhe raas aa gyi thi....

Isliye mujhe sirf 3 din lge ha krne ko....

Ha krna aur 15 dino me sagai ho rhi thi actually baat ye thi mere se jyada jaldi shakti ko thi kyunki uski ma ki tabiyat bahut kharab rhti thi....

Ek din bharish ho rhi thi hm khidki ke bahar dekh rha tha barish ki bundo ko dekh achanak bharish ka rukh meri taraf ho gya aur mere muh se nikla I Hate Barish....

ye ki arranged marriage Kyu love marriage kyu nhi khyaal aaya ki shakti ko phone kr ke apni peechli zindangi ke baare me bta du...

Phone kiya ring hua fir phone utha dono taraf khamoshi thi na jane wo kaise pehchan gye the jaan gye us pl lga hme Maine koi glt faisla nhi mujhe lga wo shayad sun nhi rhe pr wo sb sun rhe the....

Sagai din tha shaam ko sagai thi...

shakti ki ma ek jhujharu mahila thi km umr me shadi aur pati ka sena me saheed hona fir apne bachcho ko akele palna aur ek bahut badi beemari yani cancer se lad kr zindangi ke liye aayi thi koi nhi keh sakta ki wo ek savandenshil aur itni sahsi mahila hai shaadi ke liye ha krne ki ek ye bhi wajah thi ki unhone shakti ko bhi wahi shiksha di hogi.....

jb mujhe gale lgaya to ankho me jivan ki hazaro utaar chadaw ki kahaniya thi....

Shaadi ki date 2 mahine baad ki date nikli thi...

Ye 2 mahine kb bhaag daud me nikal gye the.

Shakti ne wahan 2bhk flat le liya tha ab wahi rahne wale mai shakti aur uski ma....

Shaadi Delhi me thi hm ek hafte pahle pahuch gye the hmne ek house rent pr liya tha shaadi ke liye....

Shaadi se 3 din pahle papa kamre me aaye aur ka beta zindangi ek waiting room hai jatin kyunki is zindangi me bahut se log aate aur rukte bahut km log pate the....

shaadi badi saadi tarah se ho rhi thi kyunki shakti aisa chahte the...

Pahle hawan fit sindoor daan...

Shaadi ki bhagam bhaag me lge the shadi ka din tha mai aur shakti alag room me tyaar ho rha the aur wo alag room me tyaar ho rha the...

Maine shakti ko massage kiya...

Shakti I want to run away from this....

Udhar se reply aaya kya mujhe bhi aane doge kaho to tumhare papa se puch lu....

Maine fir massage kiya kya ye sb krna zaruri hai....

Udhar se reply aaya nhi tum kaho to.....

Us waqt mujhe lga ki chirag le kr dhundhta to shakti jaisa ladka nhi dhoondh nhi pata mai...

Mai pyaar aur zarurat me farq janta tha isliye kamre se tyaar ho kr nikla mujhe shakti ke left me bithaya gya tha hawan do ghante to hua mai uthkr mammi ke pair chune ko badha to mammi ne shakti ki ma ki taraf ishara kr diya mai unse bolne wala tha bs mammi ab aap araam karo....

shakti ki ma saas phulne lgi aur wo behosh ho gyi anan fanan me hospital le kr gye mai aur shakti ki ma ek gadi hospital le kr gye shakti corridor me doctor se baat kr rhe the meri ankhe nichi aur meri aur zindangi se dooriya nazar aa rhi thi....

Shakti mujhe apne flat pr pr chod kr hospita chale gye shaadi adhuri thi us 2bhk flat me akela tha socha kapde badal lu pr mere kapde nhi the maine mammi ko phone kr ke kaha mammi mere kapde bhijwa do

mammi ro rhi thi papa ne phone le liya aur beta yahan ghr aaja beta maine se kaha mere the to yahan hai papa khamosh rhe aur kaha god bless you beta.....

Hospital me shakti aur shakti ki behan thi main mere my new flat ki balcony me tha soch rha tha wo 9 saal ka ek sawal fir se mn me ghr kr rha tha kaas mai aisa na hota papa mammi aur bhai sb meri wajah itna pareshan na hote.

Mammi ko high blood pressure tha is wajah se hospital se ghr le kr aa rhe the.....

Mammi (meri saas) ne kaha tum duniya ke pahle couple ho jinki adhuri shaadi hui hai...

Maine kaha apke bina shaadi kaise ho pati....

Shakti ki ma mujhe dekhe ja rhi thi flat pr pahuche to sb the mammi papa bhai bhabhi bua didi sb the adhuri shaadi puri hui raat ko phoolo se mehkta room tha shakti aaye....

Shakti ne kaha koi afsos to nhi hai jatin maine kaha ek afsos hai shakti...

Mai shakti ki taraf dekhne ke bajay bahar dekhne lga shakti mera chehra padh rhe ho maine shakti ki taraf dekha aur muskurate hue kaha shakti meri zindangi me do logon ka pyaar rha ek papa aur dusra Bhai..

Kash hm do mahine pahle na mile hote kash do saal pahle mile hote to hmari arranged marriage nhi love marriage hoti ye afsos rahega........

Sunday, 19 November 2017

Do alag sadakein

Ye baat tb ki Jb mai engineering Ke sapno Ko pura kr hi chuka tha….

3 saal se topper hi tha aur 12 me president medal bhi mila tha Papa bade shuak se ristedaaro Ko dikhate the…..

Mera naam dheeraj hai aur sb mujhe dheeraj ji bulate hai wo kahte hai na ki umr se pahle samman aur jyada gyan dono hi achcha nhi hota….

Log mujhe matured maante the aur hostel ya hostel ke kisi bhi ladke Ko koi problem hoti thi to mujhse hi kahte the kyunki wo mujhe apne deemag se jyada paripakya maante the…

Koi bolta tha dheeraj ji meri girlfriend ne chhod diya ya dheeraj ji mere boyfriend ne chhod diya…..ya kbhi hostel ki koi dikkat….. 

Dheeraj ji ye dheeraj ji Wo dheeraj ji yahan dheeraj ji wahan be yahi sb chalta tha……

Un Dino meri adat baki ladko ki tarah nhi thi jo hr waqt C.S ki ladkiya dekhne ya chhutti pr mall ja kr kapde khareedne ka…

Mai to meerut se lucknow aaya tha apni electrical engineer ki padhai krne…..

Yahan kisi ne mujhe ye nhi kaha ki mai old fashion hu pr meri class ke hi ladko ka respectfull behaviour mujhe kbhi kbhi pareshan krta tha…..

Aur is se mai akela sa hota ja rha tha mujhe dost chahiye the apna grup bnana tha aur unke sath collage ke campus me tahlna chahta tha…..Mere classmate jo the wo classmates km chhote bhai behan jyada the isliye guardian ki tarah jyada pesh hona padta tha…..

Akhiri semester se pahle fir ek baar collage fest aa gya tha lgta tha ek baar fir sb nach rhe hoge aur mai apne hostel ke room me hunga kbhi kbhi lgta tha ki mai inloge se alag hu….

isliye in logo ki tarah mujhe apni collage life enjoy nhi mujhe to bs padhna hai aur padhna hai….

Kuch na kr pane ka tark shayad tark nhi hota wo ek dilasha hota jo khud Ko deta hai…..

Mera roommate rajat fest me hone wale natak ke audition dene ja rha tha halaki usne kbhi acting nhi ki thi isliye wo thoda dara hua bhi tha…..

Mere samne aa kr bola plz dheeraj ji chaliye na meri bahut na nakur ke baad bola u need to change dheeraj ji….

Change ke chahat me mai agle din rajat ke sath chalne Ko tyaar ho gya…

Mai aur rajat audition ke pahuche hi the ki sb apni baari ka wait kr rhe the….

Natak mechanical branch ka ek grup krta tha aur wo fest me first aata tha….

Theatre director vikram sharma apni mehangi gadi se nikalte hi chillaya…

Don’t waste your time we huv only one role left nd that for male…….

Us pr rajat bola dheeraj ji vikram…

Vikram kitna cute hai ye role mujhko Ko mil jaye fir dekhna natak ke hero se uska hero bn ne me der nhi lgegi…..

Dheeraj ne kaha cute bilkul Bandar dikhta hai….khud Ko kahan ka hero samajhta hai jo sb se chilla ke gya hai…..

Mai rajat Ko all the best keh kr nikal hi rha tha ki peeche se awaz aayi……

Neeli shirt kya keh rhe the mujhe ghamand hai. Ghamand hai mujhe agr mai Bandar hu to tum kahan ke hero ho…

Asaan kaam lgta hai kr loge acting…

Pahli baar peechle do saalo me kisi ne itne badtameezi se baat ki thi…

Itna rude itne gusse me.

Mujhe bhi gussa aa gya aur bola ha bolo kya krna hai tb kya mujhe ek kagaz pakda diya gya aur log mere angrezi ke hindi numa action pr has rhe the…

Mn me khyaal aaya aaj ka din to bejeiti divas ghosit kr dena chahiye…..

Pahle vikram fir ye collage walo ki hasi….

Aaj ki hui ghatna yaad aate hi lgta tha ki dheeraj ye duniya tere jaiso ki nhi hai duniya unki hai jo dikne me cool ho handsome ho aur tum to….

Tbhi darwaze pr knock hua dekha to rajat tha….

Dheeraj ji Wo role. Mujhko mil gya vikram is so impressed aur suniye kl chal rhe hai hm.

Maine kaha rajat tu hi jana mai nhi 

Are aapko ana hi padega wahan Dr lgta hai mujhe…

Rajat ki is zidd ke Aage jhukna pada mujhe…..

Theek hai rajat ab tu soja aur mujhe padhne de mera table lamp on hi tha padh to kitab rha tha pr chapter vikram wala hi chal rha tha jahan sb mujhe itni respect dete hai aur ye chill kr Chala gya…..

Pr ek baat achchi thi ki aaj usne bhimujhe ji nhi kaha koi aisa hai jo wo kisi aur Ko treat krta ho….

Yahi soch kr sone ki koshish krne lga……

Kl Jb gya to peeche se awaaz aai kl ke liye sorry kl bahut jyada hi bol gya maine kaha nhi maine hi apko bhala bura kaha tha I should be sorry…..

Usne puchcha kahan se ho maine kaha ji meerut…


Usne kaha tumhare yahan muskurane pr tax lgta hai kya….

Usne puchcha chai peeoge maine kaha OK isi bahane dheeraj tum maaf bhi kr doge ye pahli baar tha ki mai canteen me chai akele nhi kisi se sath pee rha hu…….

Mai soch rha tha ki ye chai khatam hi na ho kai baar maine jhuth chuskiya bhi canteen me sb dua salaam kr rha tha aur vikram sb se mera intro….

Ye dheeraj hai pahli baar koi ji nhi bol rha tha achcha lg rha hai…..

Usne kaha dheeraj chai ke paise tumhare maine kaha chai ke liye tumne puchcha tha…..

Usne kaha oye blue shirt fir jhagda mt kr wahan canteen me uski baato pr jawab dena ka koi tuk nhi tha…..

Tbhi canteen me paise diya aur Chala gya….

Room pr pahuche to mobile pr msj pada tha…

Likha tha blue shirt kl ki chai meri taraf se…


Maine puchcha mera nmbr kahan se mila…

Jawab mila pta kr lo….


Thodi der baad msj aaya jyada sochcho mt rajat se mila….

Maine koi jawab nhi diya…

Mai kitab ke panne palat rha tha ki yahi soch me ki kl jana bhi hai ya nhi….

Fir khyaal aaya ki exam aur percentage ye sb mere chart or deemag me ek anti virus ki tarah kaam kr rhe the….

Aaj 5 baj chuke the chahte hue bhi Jane ki himmat nhi kr paya….

Na Jane ki wajah se na koi call na msj mn me chal rha tha ki chai pe bulaya bhi aur na puhucha to koi farq bhi nhi pada……

Na koi msj na call mn udas tha….

agle din kl collage gya to ek classmate ne ek parchi di likha tha blue shirt kl kyu nhi aaye…..
Tbhi ek msj aaya blue shirt 5 baje canteen aur chai…..

Aaj jana kaise miss kr deta ye shaam ki chai…

Ab ye sil sila ho gya tha.aaj badi himmat kr ke puchch hi liya tum pr to itne ladke marte hai to mai hi kyu.

Usne kaha apki pahli baar muslurahat pr hi Mr mite the hm fir to collage ka campus ki hr jagah ghumte the…

Mai alag hi duniya me tha wo mujhe muture ki tarah treat nhi krta mujhse mazak aur mere se mazak krta tha……

Aur yahi sb mujhe achcha lg rha tha.

Dono collage bunk krte fir collage ke peechhe baagh me amrood khate the

Kbhi dusre Ko pakdte the…

khoob masti krte the aisa lgta tha bachpan me the…

Yahi sb kuch krna chahta raat bhr ut patank chizo ki list aur din bhr krna.

Wo angrezi me ek kahawat hai na all good things come in end….

Mujhe bhi yahi lgta tha ki ye khushi kuch waqt ki to nhi….mai badal rha tha ya waqt jin cheezo se mujhe chid hoti thi wahi cheeze ab kr rha tha….

Ab class me km aur garden me jyada mn lg tha kyunki ab mai apne aap Ko kisi se km nhi samajhta tha…

Ab canteen me sbki nazaro se chhup kr use ankh maarne ki himmat aa gyi thi.

Ek raat vikram 11 baje usne call ki shayad usne pi rakhi thi mere hostel ke room me aa gya tha un Dino rajat bhi nhi tha….

Puri raat mujhe neend nhi aayi Jb subah vikram room se gya sb mujhe aur use ghoor rhe the….

Ek din shaam Ko hostel puhucha to rajat kasim aur vikky meri hi baat kr rhe the wo bhi meri tarah the…

Keh rhe the hme pta kaise tumne vikram pr dore daale hai rajat ne kaha kahan wo handsome cool aur kahan tum.

Tum vikram ke liye nhi bane us din bahut bhala bura bola rajat ne..

Apne room per yahi soch rha tha ki shayad rajat sahi kyunki mai uske liye nhi hu Aur uska mazak nhi bnte nhi dekh sakta wo bhi meri wajah se..

Tbhi vikram ka call aa tha itni himmat nhi thi ki uska call pick kr Pau.mn me khyaal bs do mahine ki to baat hai do mahine baad exam fir placement aur sb apni apni jagah….

Ye baat maine vikram Ko btayi to use pta tha ki mera focus sirf padhai pr hai usne muskura kr ha me kr di….

Wo do mahine meri Zindangi sbse lambe aur kharab din the exam ke baad farewell tha sb apni photo me sajon rhe the aur mai sbse khoobsurat lamha jo vikram ke sath photo khichwa rha tha…

Vikram ne puchcha ab Aage…

Badi himmat ki thi isi din ke liye jo kahna tha wo kahta gya…

Vikram mai  tumhare liye nhi hu tumhe aisa banda chahiye jo tumhari tarah ho cool ho handsome ho aur kahan mai boring mai to good looking bhi nhi hu…..

Maine kaha hm do alag sadakein kisi chaurahe pr mil bhi gye to kya hm dono ki alag disha hai……


Is baat Ko huye char saal ho gye aaj fest ka invitation dekha to ye sb yaad aa gya jaise aaj puri purani yaado me lgi barf pighal gyi thi.

na Jane us din maine itna kuch kahne ke baad is din ki kalpna nhi ki thi…

Hm wakai do alag sadakein the.

 invitation tha mere collage se lucknow se mere pati ke naam…

Vikram dheeraj sharma….

Monday, 25 September 2017

9 saal se wo ek sawal....

Aaj 9:15 pr mai apne writer dost ke yahan uske Naye 3bhk ghr ki party me tha. Anjaan 120 logo ke sath...

Jb mai aur abhay is party me aa rhe the to Khambhat radio jockey ne wo gana baja diya tha...

Tu hi tu hi re tere bina mai kaise jiu....

Aur ab is gaane ko gane wala mere 9 saal baad mere samne tha anmol wo mujhse kuch 12 meter ki duri pr tha....

Mere abhay ek mechanical engineer wo bahut achche in 9 saalo me unhone mujhe bakhubhi samajha...mujhe 6 baje uthana mujhe dopahar me lunch ke liye puchchna na Jane kaise unhe meri hr zarurat ka pahle se pata chal jata hai....

Mere ek office colleague ne introduce krwaya sir meet my bf anmol...

Hmne anjaano ki tarah hath milaya uske chehre me ek jhoothi muskan thi...

Maine man socha jo mera na ho paya mere dost ka ho kr mere samne khada tha....

Tbhi abhay apne hath me liye soft drink aa gye maine introduce kraya meet my love abhay....

Wo abhay Ko dekh rha tha aur abhay usko...

Thodi der baad abhay Ko koi apna dost dikh gya aur wo Chala gya aur mera wo dost bhi...

9 saal baad aaj hm pair aamne samne khade the..

Maine us se puchcha ki us raat 9 baje tum kyu nhi aaye the mai wahi magazine stall ke bahar tumhara 6 gante intzaar krta tha pr tum nhi aaye.....

Tbhi meri jaise neend tooti ho waiter ne puchcha sir will u huv some chilli paneer....

To paya mai khud se puchcha rha tha anmol to mujhse dur khada tha uske paas gya aur wo nazaro jhukaye hue tha maine fir sawal kiya us raat tum kyu nhi aaye the....

Usne kaha kuch jawabo ke liye kbhi koi sawal nhi hote...

Usne puchcha kaise ho tum..

Maine fir wahi sawal puchcha kyu nhi aaye the US raat tum....

Usne abhay ki taraf dekh kr kaha achcha hai wo...aur anmol Chala gya tha..

Tbhi abhay jo hme dekh rhe the unhone paas aa kr kaha jante ho kya unhe maine nhi me jawab diya....

Mujhe achche se yaad hai ye wahi ladka tha jo ghr me bahana ya jhooth bol kr mujhse milne aata tha...

Kya ye wahi ladka jo collage ke baad tution ka bol kr mere sath film dekhne aata tha...

Kya ye wahi anmol hai jo rang wahi rang pehnta tha....

Kuch der thahar kr fir anmol ke paas tha maine uski nazaro me dekh kr wahi sawal kiya....

Ye bhi puchcha ki ki tum wahi anmol ho na jo mere zara si chot pr pura ghr utha lete the...

Usne meri or dekhte hue kaha mai apke dost shashank ke sath hu tbhi wahan abhay aa gye unhone puchcha ki aap log ek dusre Ko pahle se jante hai is pr usne jawab diya nhi ye mujhe kuch aur samajh rhe hai galatfaimi hai inki.....

Tabhi anchor ne truth aur dare game ka naam liya...

Ji ha ye ek aisa game Jisme 12 log apne samne hote hai aur beech me ek bottle ghumayi jati jiski taraf aa jaye us se truth ya dare....

Party dheere dheere garam ho rhi thi....

Kareeb 20 minute baad 

Mera nmbr aaya aur maine apne dost ke partner yani anmol se sawal kiya...

Ki kya apko shashank se pahle bhi kisi se pyaar tha..

Party ki gunj ek dum se khamoshi me badal gyi...

Unhone jawab diya nhi maine sirf shashank Ko hi pyaar kiya hai....

Wapasi me 20 minute tk khamosh raha mn us raat ka khyaal aaya...

9 saal pahle anmol ne btaya ki uski shaadi krna chahte hai maine anmol se kaha chalo bhag chalte hai...

Mai 9 baje kanpur central ke platform 1 pr 9 se 3 baje tk intzaar krta rha pr wo nhi aaya dheere dheere platform sunsaan hota ja rha tha sb apne safar Ko nikal pade the wo sardi ki thithurti raat mai lakdi ki bench pr baitha rha jaise jaise raat ho rhi bheed km ho rhi thi platform pr sote hue musafir the jisko na kahi jana na aana mai in me se hi tha.. .

Kash us raat tum aa gye hote to aaj gadi me abhay tum hote....

Abhay ne sawal kiya kya hua bahut chup chup ho maine jawab diya nhi to kuch nhi hua.....

10 minute ki khamoshi ke baad achannak abhay bol pada 

Mai janta hu ki tum mujhse pyaar  nhi krte ye wahi anmol hai na ek baar glti se tumhari dairy padh li thi wo kitabo ke beech uske panno me rakhe wo sukhe phool aur wo Khat jo tumne Atul Ko likhe the pr kisi pate pr bhej nhi paye the tum aur wo tumhara ek sawal....

9 saal se is ek raat ka intzaar kiya hai shubh ki tumhe  tumhare sawal ka jawab mil jaye....

Aur mai ye bhi janta hu ki hr saal 15 December Ko hm bahar khana khane kyu jate hai anmol ka birthday celebrate krte hai....

Mai uske samne nazaro jhukaye baitha tha ankho me pani aa rha tha aaj mera dil aur ankh dono ro rhi thi....

Us se nazare milane ki himmat nhi ho rhi thi ki 9 saal se sb janta hai fir bhi....


Tbhi mere mobile baja dekha to ek email aaya hua tha anmol ka tha..

Likha tha....

Us raat isliye mai nhi aa paya kyunki tum mujhe paglo ki tarah pyaar krne wale ashiq to bn sakte the pr Zindangi bhr sath nibhane wale ek achche pati nhi....

Isme koi shak nhi ki tum ek achche pyaar krne wale nhi bs tum ek achche pati nhi bn sakte the....

Abhay bahut achcha tumse bahut pyaar krta hai....

Shayad aaj 9 saal baad ek pati bn jaao....


Maine mobile neeche rakha aur gadi side me lgai aur abhay ka hath pakda aur apni nm ankhe uski ankho me daal kr kaha....

Jo kbhi 9 saalo me nhi kaha tha....

Abhay I love you thank you for being my love...

Thank you for everything.....

Love u lot.........❤❤❤❤❤❤❤❤❤

Sunday, 30 July 2017

17 saal ka pyaar

Tumhe yaad hai Jb tum class me pahli baar aaye the tum khidki se bahar dekh rhe kuch.mai bag rakh ke Chala gya tha tumne palat ke bhi nhi dekha tha mujhe…

Class me tumhari bench aur meri bench me ek hath ka fasla tha. Maine khud naapa tha….

Kyunki kai baar tumhe chhune ki koshish ki thi….

Us din yaad hai Jb tum kuch padh rhe to maine tumhe disturb kr diya tha aur tumne mujhe apni angaaro wali ankho se dekha that….

Us din hi faisla kr diya tha ki tumhe apna bna kr rha hu…

Tumhe yaad hai Jb school me shobhan sarkar gye the aur wahan wo andheri gufa thi…sb ek dusre takra rhe the anjaane me ya jaan bhoojkr aur tum bada sambhal kr chal rhe the….

Na jaane kyu aaj atit itne saalo baad Aage aa khada tha aur would sb yaad aa rha tha….

Aaj 47 saal baad sb ek dum achannak yaad aa rha tha sayad us pl me tha kuch aisa… 

Tumhe yaad hai Jb pahli baar tumne mujhse baat ki pr mere mn me tumhare liye kuch aur hi tha….

Mai bhi dheet tha tumhare hi ghr ke samne khada hota tha shaam Ko….

Intzaar krta tha tumhare chchajje se bahar aane ka kbhi aate aur kbhi nhi….

Fir ek din himmat kr ke bta diya tumhe

Ki shubh I love u pasand krta hu tumhe..

tumne meri taraf dekhte hue kaha tha…

 Ye sirf ek attraction hai aur kuch nhi…

Tumne maano mere Pyaar Ko gaali de di ho fir tum mujhse dur rhne lge the….

Ab hm 11 me the aur ab hme apne subject chun ne the…

tumhe ek doctor bnana tha aur mujhe to tumhare alawa kuch aur samajh nhi aata tha.

11 me ek ladka aaya tha satyam naam ka wo bhi bio padta tha aur tum bhi Jb tum dono sath me baithte the mujhe bahut gussa aata tha pr kbhi kbhi lgta tha tum mujhe jalane ki koshish krte the…

Sach hai na ye shubham….

Tum class ke un bachcho me the jinhe teacher Pyaar se samajhate the….

Ki dur rhna siddharth jaise awara ladko se aur tumne kah bhi diya tha ek din ki sahi kahti archana mam tum na khud padhte ho na dusro Ko padhne dete ho…

Us din to archna mam ki schooty ke dono pahiyo ki hawa aur tall light fod di thi….

Tumhe to pta tha ki kisne kiya hai ye sb… 

11 pura hua 12 aa gya tha tumhe yaad hai 5 Sept Ko tumhara favourite colour blue shirt pahni thi…

Aur tumne kaha tha ki tumhara favourite colour green hai…..

Us din satyam green colour ki check shirt pahn kr aaya tha us pr ink phek di thi…

Bechara satyam…….

12 Ko akhiri waqt tha usne btaya ki satyam ne mere aur apne selection ke liye vrat rakha hai us din mn kiya usko ink ki bottle me ghused ke ganga ji me fek aau…..

Tumhare 12 me theek thak marks aaye the aur mai second division paas.. 

Collage me tumne bsc. Li bio se aur maine arts.

Tum mn lga kr padhai krte the aur mai mera mn kahi aur tha…..

Tumhe disturb bhi bahut krta tha kbhi tumse ghumne Ko kahta kbhi bike pe highway pr long drive pr chalne Ko..

Tumne ek din kah hi diya mujhe mere carrier pr dhyaan dene do us din soch liya tha tumhare carrier ke Aage meri koi value nhi khoob roya tha us raat ko….

Waqt Ko maano pankh lg gye the tum medical collage jaane ke liye form bhr rhe the tumne 2 baar form check kiya tha….

Tum Jb andar lifafa lene gye the to maine apni Zindangi ki sbse badi bhool ki uska parinaam nhi socha….

Tumhare form ko jahan jahan jagah thi wahan glt salat bhr diya….

Pachchtawa bhi hua pr ye soch kr khush tha ki tum kahi jaa nhi paaoge….

Pr………

Tumne milne ki koshish nhi ki to maine khud hi tumhare ghr aa gya….

10 minute ki khamoshi ke baad tumne kaha mujhe delhi me collage mila hai….

Tumne aur bhi kuch kaha tha ki kuch log kbhi badal nhi sakte…..

Tum delhi aa gye the aur mai wahi kanpur me…

Na tumne milne ki koshish ki na maine milne ki himmat….

Tbhi nurse ne kaha call the doctor shubh Srivastava wo ek naam maano meri atit ki sari galtiya bta rha ho…

Mera appendix fracture hua tha mn me tha kya sare jahan ke doctor Mr gye hai jo wahi sirf bacha hai….

Dard bahut ho rha tha anshu bhi aa rhe the pr ye anshu Dard ke nhi the…

Mn me khyaal tha ki itna pareshan kiya hai ki wo mujhe maar dalega…

Tbhi halki roshni me shubh dikhayi pada….

Maine kaha…

Now ball is in your court doctor do whatever you want to do….

Usne mere sir pr hath rakha aur itne sneh se kaha kaise ho siddharth…

Mere anshu ruk hi nhi rhe the itna Pyaar se kaha tha tb kahan tha ye Pyaar Jb…….

Usne mujhe aaj bhi mera carrier Pyaara hai…..

Operation ke 2 gante baad hosh aaya…..

Pr shubh nhi tha wo ja chuka tha khush tha ki meri galtiyo ko usne maaf kr diya pr ye puchch nhi paya……

                              By.

                                    Siddharth srivastava

Sunday, 9 July 2017

Dooriya....

Dur khstiz me suraj doob rha tha aur mai bhi doob Jana chahta tha maano sagar ki thapak thapak lahre ufaan maar rhi thi maano keh rhi ho baaho ke samete tumhara to intzaar tha aur mai chalte chalte mai kinaare se dur aa gya tha ek lambi saans li aur sagar ki gehrai me Jane lga paani ka dabaaw aur ek saans ke sath apne aap ko sagar me kho jana chahta tha ki tbhi kisi ne meri baayi kalai pakdi aur upar le aaya mere hatho me jasmine ki maala thi aur wo pani kamar tk paani me tha shayad kinaare pr hosh aaya to dekha koi mere aas paas nhi tha bs basuri ki dhun sunayi de rhi thi....
Dekha to ek parchchai saaf chehra le rhi thi wo muskurahat se dekhta hue jà rha tha ....

mai uske peeche peeche chalne lga tha wo church ki sediyo me baitha basuri baja rha tha...

Maine father se uske baare me puchcha to unhone kaha ye varun hai nishant ka varun.....

Varun hmari basti sabse achcha tairak aur iski mohhbbat tha iske bachpan ka dost nishant.....

ye dono hmari basti ki jaan the jis nishant varun ko muskurahat se vida nhi krta tha wo din varun ka the aur ek theek nhi jata tha....

basti ke hr jashn me varun basuri bajata tha aur nishant bs use muskurahat se dekhta rahta tha....

Maine father se puchcha to varun ki ye halat aur nishant kahan hai....


Father ne kaha nishant bahut dur hai varun se ab...

Father isa ki murti ki aur dekh rhe the aur ek mombatti ki taraf dekhte hue kaha...

Jante ho beta nishant ke father ne hmari basti sabse mahnga suit khareeda tha nishant ke liye...

5th may ko shaadi hone wali thi aur 3rd may ko nishant ne varun ko beach pr bulaya tha...

Mn me khyaal aaya ki itna bebak shaadi ke do din pahle milne ko bula liya...


Father ne kaha nishant riti reevazo se mukt tha wo maanta tha pr jb tk use sahi lge....

Mn me khyaal aaya ye to bilkul meri hi tarah tha sb cheezo free rakhna chahte hu duniya daari ki koi parwah na krna....


 3rd may raat ko nishant Peter ki naaw se tek lga ke khada tha varun aaya....

Nishant kyu bulaya varun ne puchcha....

Nishant ne varun ka hath pakda aur kaha aaj se pahle jb tum sagar me jaate to mai kinaare se khade hokar dekhte tha..

Meri khawhais hai aaj tum dekho mujhe muskuraate hue..varun ko pata tha jo usne ek baar thaan liya wo karke rahta hai...

Varun mna krna chahta tha pr nishant ne hontho pr hontho rakh diye aur kaha varun jb mai light house ke paas honga to lalten hilaunga tum tairate hue aana mere paas....

Jb tk varun kuch kahta tb wo naaw ke chuppu chalane lga tha.

Varun us din sagar se prey kr rha tha.

Sagar mujhe mera nishant sahi salamat chahiye....


Varun nishant pasandeeda dhun..

Sakuntla taleni mukundan.


Dheere dheere varun apni basuri ki dhun se tez apne dadkan sunayi de rhi thi...

Wo awaze lgaye ja rhe usko pta tha ki us tk nhi pahuche ki..

Mn hi mn mai bhi nishant ki salamati ki dua maangne lga tha..


Father ne kaha beta jaisa hm chahte hai waisa ho jaruri nhi beta..

Basuri ki dhun ab sunayi nhi de rhi thi..

Father ne kaha nishant wapas nhi aya varun tairate hue gya jiska Dr tha wahi hua naaw ulti padi thi jb basti walo ko pta chala to sb koi dhundh rhe the...

Kahte hai samundr kuch bhi apne paas nhi rakhta sb wapas kr deta...


Aaj bhi varun samundr ke kinaare baitha nishant ka intzaar krta hai...

Maine church ke bahar Jane lga to peeche peeche father bhi aa gye...

Mai mn hi mn Soch rha ki aaj samundr se mai nhi nishant nikalta to varun ke chehre ki muskaan bni rahti...

Mai fut fut kr ro rha tha ab kis tarah ki mohhbbat hai ye....

Isme dooriya ho kr bhi nhi hai ....


Father ne kaha maine kai baar kaha ki nishant ab nyi hai wo has kr kahta nishant mere paas nhi to door bhi to nhi mere zehn me basta hai wo....

Varun kahta hai mai usko awaaz dena kbhi band nhi karunga kbhi na kbhi to aayega mai intzaar karunga uska....


Maine hasne lga aur mn me Socha ki haan Rishton ko awaz dena bhi zaruri hota hai...

Maine isa ke samne sir jhukhaya aur apne room ki taraf chal pada mn me khyaal tha aaj abhi ko awaaz dunga kahunga chalo pahla pyar krte hai...

Room pr pahuch kr......

Abhi ka maine hath pakda aur kaha sorry...

Abhi ne kaha bahut din se baat krna chahta tha pr Dr rha tha...

Maine kaha mai tumhe samajhta hu mujhse Mt dra karo....

Maine abhi ko bahon me bhr kr chalo pahla pyaar krte aur dusri baar Krte hai....

Only a imagination I want someone to understand my love for him.....❤😊


Abhi kuch kahna chahta hu tumse sayad tum Jane se pahle ek din aur ruk jaate to mai samajha pata ki kitna pyaar krta hu...

Tum 9 ki bajaye 10 ko jate to samajha pata ki I love you....

Abhi chalo pahla pyaar krte aur ek dusre se ek baar aur Krte hai.....


शब्दों का अहम किरदार होता है,, दूरियां बढाने में....

कभी हम समझ नही पाते हैं, और कभी समझा नही पाते हैं.....

Thursday, 15 June 2017

Do logo ka pyaar....

29 saal ka hu aur ab mere kamre me hr cheez apne jagah pr milti hai.waqt badal rha tha aur adat bhi. Meri shaadi ko 9 saal ho chuke hai.

Maine apni family aur dosto ko sachai bta rakhi thi apne baare me.jiski wajah se mere gharwale mere liye ladka dhundh rhe the….

Meri shaadi se pahle meri mammi kahti thi ki shaadi ke baad apna samaan faila kr Mt rakhna.

Maao ke paas bhavisya dekhne ki taqat hoti hai shayad…ma ne bahut kuch shikhaya tha mujhe meri shaadi se pahle…

Shaadi ke baad maine kisi ke baare me apne aap se pahle sochna seekh liya tha.apne roothe pati ko manana seekh liya tha ek achcha pita bnana seekh liya tha aur rote hue bhi hasna seekh liya tha….

Pr aaj nisant ke school aur rahul ke office ke Jane ke baad yahi Rahul ki study table pr baitha tha.mere samne pen pepar aur ek zehar ki sheeshi thi.jo bahut Dino se maine taad rakhi thi aur aaj is dophar use lekar baitha tha…

Is dophar ki kahani kai kai dophar pahle shuru hui thi.

Papa ka transfer hua tha kanpur dada ke ghr jaisa bada nhi tha ye 2 bhk flat me rahna seekh liya.dada ke ghr ke bageeche me tahlta tha pr yahan chhoti si balcony me jagah hi nhi thi itni…yahan peeche foolo ki kyariya nhi thi the to bs gamle….

Bahut kuch naya seekh liya tha ab mai yahan purane mohalle ki tarah chachi nhi aunty kahna seekh liya tha cycle se darta tha pr ab mai mopet chalana seekh liya tha.

Kanpur ke collage ki parking me mopet khadi krte waqt peeche se gadi ne horn diya dekha to raman tha hmse ek saal senior tha wo joint secretary tha aur collage president bnana chahta tha log use jante to the…kyunki chhote  seharo me dancing aur singing realty shows me hissa liye celebrities to nhi hote the…

yahi collage me Jane maane chehre hote the.aur inki duniya inhi ke ird gird hoti thi….

Aur raman hazar tareeko se jatata tha ki he likes me..thoda dabang type tha pr achcha tha…

Swastika tea staal me chai uthate waqt hath hm dono ke takra hi gye.tb se to milna julna shuru ho gya…

Dosto ne kaha bhi tha ki kisi anjaan se itna milna aur ma ne bhi ajnabi se baat krne se mna Kiya tha….

Pr raman anjaan nhi tha wo to mujhe janta tha achche se…

Dheere dheere hm logo ka yun bike me ghumna park me haath me hath daal kr talhana hm logo ki nazaro me aa rhe the.pr raman ko koi farq nhi padta tha dheere dheere sbko pta chal rha tha.

Raman nayi black color ki bike laya tha wo chahta tha sbse pahle mai baithu.hm bike pr baithe aur library ke samne se hote hue nikal gye.logo ke kaan hote hai aur ankhe to jarur hoti hai…

Ye baat ma ke satsang me ek aurat pta chali…

Shaam ko ghr aaya to maa ne itne zor se kaan kheeche to rona aa gya…

ma ne ek sauda kiya ki wo papa ko kuch nhi btyengi mai raman se milna chhod du.papa waise mere aise hone se pareshan the aur pareshan nhi Krna chahta tha unhe…

Raman fir mujhse milne ki koshish krta phone krta mai kahunga deti wo mandir gya hai wo paglo ki tarah hr mandir me mujhe dhundhta.

Ek din ghr ka nmbr change ho gya aur pta chala us din ke baad wo pyaar nhi mujhse nafrat krne lga tha. Bura admi bn gya tha bahut bura…

Graduatetion complete hue do saal ho gye the aur ab raman se milna chhod diya tha.rota tha bahut pr papa ke samne dikhata tha khush hu pr nhi tha mai us din raha nhi gya to raman ko phone kr ke kah diya mai ab nhi milunga tumse.raman khamosh tha fir kaha please ek akhiri baar mil lo seemant bs ek akhiri baar city heart guest house ke restautrent me.

Mai aaya raman bhi gussa tha raman mere is vyavhar se aur mujhse bhi.usne do nhi ek chai order ki jb waiter change lene gya to usne us ek foot ka dyra khatam kr ke mera hath tha am liya mano koi button daba diya ho mere ankho ke ashuo band tut gya ho. Raman ne kaha muh dholo thodi der baad hmare liye ek kamra khol diya gya kamre ka darwaza band krte hue mai lipat kr rone lga….

Meri Graduatetion ko 3 saal ho gye finally papa ko Rahul mile hme sath rahte 9 saal ho gye the.rahul bahut achche hai Din me Chahe kitna busy ho lekin ek baar phone kr ke jaroor puchchte the ki maine khana khaya nisant ne khaya ki nhi..Rahul bahut achche hai shayad romantic nhi hai…

Rahul ki photo me dekhne ke baad reality me dekha tha jb ghr pr hmari shaadi me.

Raman ko do seedhiyo pahle hi chhod aaya tha Rahul ke ghr ki jb seedhiya chhadi to.

Rahul ne apni zimmedaari in 9 saalo me bakhoobi nibhai…

Meri duniya me do log hi to the ab ek Rahul aur hmara beta nisant. nisant Rahul pr gya tha achcha hua mujh pr nhi gya.rahul ki tarah hosiyar class me first second hi aata hai..

Rahul ne nisant ko waada kiya tha ki ab ki baar first aaya to ek computer le kr denge wo ziddi aa gya…

Ab TV aur khel nhi sirf computer hi lga rahta hai ek din naste ke waqt kahta hai…

mujhse papa kitne hoshiyar aur aap budhu chalo computer seekho..

To ek din mera Facebook account bna diya gya maine to kah diya tu hi operate kr mujhe nhi aata ye sb..

Abhi 3 din pahle nisant rote hue aaya aur kaha ki apke fb pr kuch tasveere hai..

Mujhe pta tha wahan computer me meri ek yaad ka lamha dikh rha tha ye city heart ke kamre ki tasweer thi zisme mere baal ast vyast aur raman se bahon me mil kr rone ki tasweer me mujhe tag kiya gya tha purani tasweer ko scan kiya tha yaad ka lamha taaza tha… pr jhooth bol rhi thi tasveere…

Kisi anjaan ne kiya tha bahut se hote aise Internet ki duniya me.meri wo pic ek chain ki tarah ek dusre ko bhej rhe the aur has rhe the mai mazak bn chuka tha…

Kanoon ki dharaao me ek ye bhi jiske liye kisi kbhi saza nhi hoti.kisi ka charitra hanan character hasination…

Ye zehar ki sheeshi tumhe bhej rha hu raman pee lena hmne police me report kr di thi nikal pade hai tumhare shehar ki or shayad ye chhithi tumhe jail me mile…

Tumhare jaisa admi mera kuch nhi bigaad sakta Rahul ko sb kuch bta diya maine tum jitne bure ho wo utne hi achche.

Unhone mujhe samajha meri maryada ko samajha meri 9 saal ki tpsya ko samajha….

Tumse alag hone ke baad khud se waada kiya tha ab pyaar nhi karunga pr waada tod kr pyaar krna seekh rha hu…

Tum meri bhool the aur rahul mera pahla pyaar….

Chhithi aur sheeshi pack kr ke post office me de aaya 4 baje gye the deewar pr lgi meri Rahul aur nisant ki lgi tasweer dekh rha tha ankhe nam ho gyi thi..

Mn me ek khyaal tha ma ko sukriya kaha us din mere kaan khechne ke liye.

Aur dusra kitna farq do logo ke pyaar krne ke tareeke me…..